इन दिनों अमेरिका बर्फासुर के प्रकोप में है। अमेरिका में कई जगह तापमान शून्य से 50 डिग्री नीचे हो गया है और हालात मंगल ग्रह जैसे होते जा रहे हैं।
अमेरिकी नागरिकों का मानना है कि ठंड का ऐसा प्रकोप उन्होंने जीवन में पहले कभी नहीं देखा था। माना जा रहा है कि एक सौ सत्ताइस सालों के बाद अमेरिका में ऐसी कड़ाके की ठंड पड़ी है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या मानव सभ्यता हिम युग की ओर जा रही है।
माना जाता है कि पिछला हिम युग 25 लाख 80 हजार वर्ष पहले आया था जो 11 हजार साल पहले समाप्त हुआ। हिमयुग में पृथ्वी का तापमान बेहद कम हो जाता है, चारों तरफ बर्फ का राज होता है। पूरी धरती बर्फ की चादर ओढ़ लेती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारी धरती इसी दिशा में बढ़ती जा रही है। हिम युग के बाद फिर समुद्री करंट से धरती गर्म होती है और नए टापू-द्वीप तथा पहाड़ उभरते हैं। वराह पुराण में समुद्र से पृथ्वी के बाहर आने की कथा का उल्लेख मिलता है जो संभव है हिमयुग के बाद धरती के पुनः विकास की कथा को दर्शाती है।
वैज्ञानिक मान्यता है कि हिम युग का आगमन वातावरण में मौजूद गैसों के अनुपात में परिवर्तन, पृथ्वी के सूर्य की परिक्रमा पथ में परिवर्तन, पृथ्वी की सतह के नीचे की टैक्टॉनिक प्लेट्स के खिसकने से पृथ्वी की सतह में आया बदलाव जो हवा और समुद्री धाराओं को प्रभावित करता है, सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा में परिवर्तन, विशाल उल्कापिंडों का पृथ्वी पर आ गिरना और बड़े बड़े ज्वालामुखियों का फटने के कारण होता है।
वैज्ञानिक कारणों के आधार पर भी देखें तो पृथ्वी की प्लेट्स खिसक रही हैं और वातावरण में मौजूद गैसों के अनुपात में परिवर्तन हो रहा है। साल 2010 में यूरोप में पारा गिरकर शून्य से 15 डिग्री नीचे आ गया था लेकिन इस बार अमेरिका में परा गिरकर शून्य से 50 डिग्री तक नीचे आ गया है जो हिमयुग की ओर तेजी से बढ़ते कदम का इशारा तो नहीं है।