अंतिम स्नान पर्व माघी पूर्णिमा के मौके पर सोमवार सुबह अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने कहा कि गंगा स्नान से मन को शांति मिली। हम सभी भारतीय हैं और गंगा के पुत्र हैं। गंगा को स्वच्छ रखना सभी का दायित्व है। जब भी मौका मिला गंगा स्नान करने आऊंगा। महाकुंभ का यह मेला बहुत ही आश्चर्यजनक रहा। यह पूछने पर कि रात यहां रुककर कैसा लगा, अभिनेता ने बताया कि मन को सुकून मिला। सारी रात भगवान का नाम यहां सुनता रहा।
सोमवार सुबह विवेक ने अपनी मां यशोधरा, चाची रूमा के अलावा बड़ी मौसी चेन्नई की जयश्री तथा छोटी मौसी बंगलूरु की चित्रा के साथ संगम स्नान किया। स्नान के बाद उन्होंने सूर्य को अर्घ्य दिया।
इस मौके पर गंगा सेवा का संकल्प लिया। इस दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती, साध्वी भगवती भी मौजूद रहीं। बाद में विवेक ने गंगा की सेवा के लिए अरैल घाट पर सफाई अभियान में हिस्सा लिया। उन्होंने परमार्थ शिविर में चल रहे भंडारे में गरीबों को भोजन परोसा और कंबल वितरण किया।
मां बोलीं, बचपन से अभिनेता बनना चाहता था
विवेक की मां यशोधरा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि विवेक को बचपन से ही अभिनेता बनने का शौक था। इसी लक्ष्य को लेकर वह हमेशा खड़ा रहा और प्रशिक्षण लिया। उसकी आने वाली फिल्म ‘जयंती भाई की लव स्टोरी’ बहुत अच्छी है। इसके अलावा जिला गाजियाबाद में भी उसने बेहतर अभिनय किया है।
महाकुंभ को लेकर उन्होंने कहा कि इतने लोगों की भीड़ को संभालना बड़ा मुश्किल काम है। यहां प्रशासन का काम काबिलेतारीफ है। पति सुरेश ओबेरॉय के नहीं आने की बात पर कहा कि मेरी बेटी को बच्चा हुआ है, वह इन दिनों घर पर ही है, वह बच्चा संभाल रहे हैं और मैं बाहर निकली हूं।
उन्होंने कहा कि वह काफी दिनों से फिल्म जगत से दूर हैं, लेकिन वह जल्द ही वापस आएंगे।