महाकुंभ में पहुंचे कई बड़े-बड़े अखाड़ों को साधना के लिए नए संत नहीं मिल रहे हैं। नया उदासीन अखाड़े की दीक्षा की प्रक्रिया इसलिए शुरू नहीं हो सकी क्योंकि निर्वाण के लिए जरूरी न्यूनतम पांच संतों का आंकड़ा पूरा नहीं हो सका। यानी दीक्षा के लिए कम से कम पांच संत चाहिए और अखाड़े को केवल दो संत मिले।
महाकुंभ से पहले अखाड़ों ने दावा किया था कि इस बार एक लाख नए संत बनाए जाएंगे लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी लोग उनसे जुड़ने को तैयार नहीं है। सबसे बड़े अखाड़े जूना को केवल एक हजार संत मिल सके। बाकियों के लिए पांच सौ की तलाश भी मुश्किल हो रही।
परंपरा के मुताबिक मौनी अमावस्या स्नान से पहले अखाड़ों को नागाओं की नई भर्ती कर लेनी होती है लेकिन नए संत न मिलने के कारण अभी तक किसी भी अखाड़े ने लिस्ट जारी नहीं की है। दशनामी संन्यासी एवं उदासीन अखाड़ों में नागा दीक्षा की तैयारियां चल रहीं हैं। बड़ा उदासीन अखाड़ा अब तक केवल 28 निर्वाण बना सका है। नया उदासीन अखाड़ा पांच का आंकड़ा पूरा न कर पाने के कारण दीक्षा संस्कार नहीं करा पा रहा है, संतों की तलाश जोरों पर है।