प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने के लिए मिशन मोड पर काम कर रही हैं। वे पिछले 15 दिनों में पांच बार उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी हैं। तीन बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश पहुंचकर उन्होंने किसान महापंचायत की है, तो दो बार प्रयागराज पहुंचकर निषाद समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। जानकारों का कहना है प्रियंका के इन दौरों से कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में मजबूती मिल रही है। पार्टी के जो कार्यकर्ता हताश होकर चुपचाप बैठ गए थे, उनमें ऊर्जा का नया संचार हुआ है। लेकिन क्या कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बड़ी सफलता मिल सकती है? विशेषकर यह देखते हुए कि यहां का मतदाता धर्म, जाति के समीकरणों में उलझा हुआ है, जिसकी राजनीति कम से कम कांग्रेस को तो सूट नहीं करती।
क्या कांग्रेस वापसी करेगी? क्या प्रियंका गांधी की कांग्रेस योगी आदित्यनाथ के सामने कोई विकल्प पेश कर पाएगी? अमर उजाला के इस सवाल पर प्रियंका गांधी के विशेष सलाहकार आचार्य प्रमोद कृष्णम कहते हैं कि वर्तमान राजनीति को ध्यान से देखें तो एक बात बिल्कुल साफ है कि अब देश की राजनीति दो विपरीत धाराओं में स्पष्ट रूप से बंटती हुई दिखाई पड़ रही है।
एक धारा वह है जिसका प्रतिनिधित्व भाजपा कर रही है- जो सांप्रदायिकता और हिंसा पर आधारित है, तो दूसरी तरफ इससे अलग एक गैर-भाजपाई विचारधारा है जो सबको साथ लेकर चलने वाली है। जो हर गैर-भाजपाई सोच को अपने साथ समेटने की क्षमता रखती है। कांग्रेस इस दूसरी विचारधारा को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने की तऱफ आगे बढ़ रही है। इतिहास में भी वह यही काम करती रही है।
उन्होंने कहा कि छोटे दलों की राजनीति अब ज्यादा चलने वाली नहीं है। इस तरह की राजनीति ने देश को बांटने और कमजोर करने का काम किया है। अगर जनता राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विकल्प खोजना चाहती है, तो उसके पास कांग्रेस ही एकमात्र स्वाभाविक विकल्प है और पार्टी इसी तरफ आगे बढ़ रही है।
जो मतदाता जातीय समीकरणों से प्रभावित होकर सपा-बसपा को वोट देते रहे हैं, क्या वे वापस कांग्रेस की ओर लौटेंगे? इस सवाल पर आचार्य प्रमोद कृष्णम कहते हैं कि देश का जनमानस भाजपा की राजनीति का एक विकल्प खोज रहा है। क्षेत्रीय स्तर पर इसका विकल्प देना संभव नहीं है। चूंकि भाजपा एक राष्ट्रीय दल है, इसलिए इस 'समस्या' का हल भी राष्ट्रीय स्तर पर ही देना पड़ेगा।
वहीं, पूरे देश की जनता देख रही है कि भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर जवाब देने में केवल कांग्रेस ही सक्षम है। लिहाजा उन्हें लगता है कि जनता भाजपा के सामने कांग्रेस को ही समर्थन देगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की बैसाखियों की जरूरत नहीं है और वह अकेले ही देश को भाजपा का विकल्प देने की कोशिश करेगी। उन्होंने कहा कि आगामी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश करेगी।