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जम्मू-कश्मीर: घाटी में क्यों भूख हड़ताल पर बैठे मेडिकल इंटर्न? जानें क्या है मुद्दा और इनकी मांगें

Mon, 07 Sep 2026 05:56 PM IST
आकाश कुमार पीटीआई, श्रीनगर

सार

J&K Medical Interns on Hunger Strike: जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों के मेडिकल इंटर्न बढ़े हुए मासिक मानदेय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सरकार से बातचीत के बाद भी आदेश जारी नहीं होने पर उन्होंने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है।
 
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Protest (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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J&K Medical Interns Hunger Strike: जम्मू-कश्मीर के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दो डेंटल कॉलेजों के मेडिकल इंटर्न ने बढ़े हुए मासिक मानदेय की मांग को लेकर सोमवार से 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी। सरकार के साथ बातचीत के बावजूद अब तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से नाराज इंटर्न पिछले सात दिनों से हड़ताल पर हैं।

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प्रदर्शनकारी इंटर्न का कहना है कि उनका आंदोलन तब तक खत्म नहीं होगा, जब तक बढ़े हुए मानदेय को लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया जाता। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर वे सरकार को पर्याप्त समय दे चुके हैं और संबंधित सिफारिश 2023 में ही की गई थी।

क्या है मेडिकल इंटर्न की मुख्य मांग?

मेडिकल इंटर्न की मुख्य मांग मासिक मानदेय बढ़ाने की है। उनका कहना है कि मानदेय बढ़ाने को लेकर सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, लेकिन अब तक इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।

प्रदर्शनकारी मेडिकल इंटर्न डॉ. फाराज ने कहा कि उनकी हड़ताल अनिश्चितकालीन है और आधिकारिक आदेश मिलने तक इसे खत्म नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सात दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अगर सरकार केवल आश्वासन देती रहेगी तो इससे इंटर्न संतुष्ट नहीं होंगे।

तीन साल से क्यों इंतजार करने की बात कह रहे हैं इंटर्न?

मेडिकल इंटर्न का कहना है कि सरकार उन्हें लगातार समय देने की बात कह रही है, जबकि वे इस मुद्दे पर तीन साल से इंतजार कर रहे हैं। डॉ. फाराज के मुताबिक, मानदेय बढ़ाने की सिफारिश 2023 में की गई थी। उन्होंने कहा कि अगर यह माना जाए कि सरकार ने हड़ताल शुरू होने के बाद ही इस मुद्दे को गंभीरता से लेना शुरू किया, तब भी करीब आठ दिन बीत चुके हैं और कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। उनका कहना है कि अब एक-दो महीने में मामले पर विचार करने जैसे मौखिक आश्वासन से इंटर्न संतुष्ट नहीं होंगे।

48 घंटे की भूख हड़ताल क्यों शुरू की गई?

प्रदर्शनकारी इंटर्न का कहना है कि सरकार पर लगातार दबाव बनाने के लिए भूख हड़ताल का फैसला लिया गया है। डॉ. फाराज के अनुसार, हर कॉलेज से दो से तीन छात्रों ने आगे आकर भूख हड़ताल में हिस्सा लिया है।

हालांकि, एक अन्य मेडिकल इंटर्न डॉ. मुशरफ ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बातचीत पूरी तरह विफल हो गई है। उन्होंने कहा कि फिलहाल 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की गई है और आगे की स्थिति के आधार पर अगली रणनीति तय की जाएगी।

अब तक कितने मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न आंदोलन में शामिल?

मेडिकल इंटर्न के आंदोलन में जम्मू-कश्मीर के:
  • 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न शामिल हैं।
  • 2 डेंटल कॉलेजों के इंटर्न भी आंदोलन कर रहे हैं।
  • इंटर्न पिछले सात दिनों से हड़ताल पर हैं।
  • अब उन्होंने 48 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की है।
  • प्रदर्शनकारियों के अनुसार, व्यापक हड़ताल अनिश्चितकालीन है।
  • उनकी मुख्य मांग मासिक मानदेय में बढ़ोतरी का आधिकारिक आदेश जारी करना है।

कॉलेज प्रशासन पर क्या आरोप लगाया?

डॉ. फाराज ने कॉलेज प्रशासन पर आंदोलन कर रहे इंटर्न को डराने और धमकाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे अपने जायज अधिकारों के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं और किसी तरह के दबाव से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि अगर कॉलेज प्रशासन आंदोलन को अनुचित तरीके से दबाने की कोशिश करता है तो इंटर्न उसका विरोध करेंगे।
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सरकार के साथ बातचीत का क्या हुआ?

सरकार और मेडिकल इंटर्न के बीच मानदेय बढ़ाने के मुद्दे पर बातचीत हुई है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे इंटर्न का आंदोलन खत्म हो सके।

डॉ. मुशरफ ने कहा कि बातचीत में कुछ सकारात्मक पहलू सामने आए हैं और आगे भी संवाद जारी रहेगा। फिलहाल इंटर्न 48 घंटे की भूख हड़ताल के जरिए सरकार पर दबाव बना रहे हैं।
 
मुद्दा इंटर्न की स्थिति
मुख्य मांग मासिक मानदेय में बढ़ोतरी
सिफारिश 2023 में की गई
मौजूदा आंदोलन सात दिनों से हड़ताल
नया कदम 48 घंटे की भूख हड़ताल
हड़ताल की स्थिति प्रदर्शनकारियों के अनुसार अनिश्चितकालीन
मुख्य मांग पूरी होने का आधार बढ़े हुए मानदेय को लेकर आधिकारिक आदेश
शामिल संस्थान 10 सरकारी मेडिकल कॉलेज और 2 डेंटल कॉलेज

फिलहाल मेडिकल इंटर्न की नजर सरकार की ओर से आधिकारिक आदेश जारी होने पर है। इंटर्न का कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन अब पर्याप्त नहीं हैं, जबकि सरकार के साथ बातचीत को आगे जारी रखने की बात भी सामने आई है।
 
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