राफेल सौदे का मामला चुनाव का अहम मुद्दा बना हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राफेल डील पर देश में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। मोदी सरकार से विपक्षी पार्टियां और कई राजनीतिक समूह मीटिंग की बात कर रहे हैं लेकिन सरकार तैयार नहीं है इससे पता चलता है कि इस सौदे में जरूर दाल में कुछ काला है।
मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को चुनाव होने वाले हैं। एक तरफ जहां यहां राजनीतिक पार्टियों का जमावड़ा लगा हुआ है वहीं राममंदिर से लेकर राफेल डील तक पर बयानबाजी का दौर भी तेज होता जा रहा है।
इंदौर में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भाजपा सरकार पर वादा खिलाफी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी ने देश में हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन वह अपना वादा पूरा करने में नाकाम रहे हैं। अगर श्रम विभाग के आंकड़ों को खंगाले तो पता चलता है कि पिछले चार वर्षों में हर तिमाही में महज कुछ हजार ही नौकरी मिल सकी है।
यही नहीं मौनी कहे जाने वाले मनमोहन सिंह ने राज्य की शिवराज सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसान बेहाल है। लोन, फसल और सुविधाएं नहीं मिलने से किसान की स्थिति दयनीय बनी हुई है। राज्य सरकार ने किसानों की समस्या पूरा करने में नाकाम रही है। उन्होंने राज्य में हुए सबसे बड़े व्यापमं घोटाले पर भी लोगों का ध्यान खींचा।
डॉ. सिंह ने कहा, मोदी सरकार को यह बताना चाहिए कि उसने कौनसे वादे पूरे किए। किसान कर्ज से मरता जा रहा है, मोदी सरकार ने हर वर्ष दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन यह वादा जुमला बनकर रह गया। सीबीआई समेत अन्य बड़ी संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। मध्य प्रदेश में व्यापमं जैसा महाघोटाला हुआ। इस मामले से जुड़े 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी ने देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया। नोटबंदी के दौरान लाइन में लगे कई लोगों को जान गंवानी पड़ी। जिन मुद्दों को लेकर नोटबंदी की गई थी वह समस्याएं आज भी मौजूद है। मोदी सरकार पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार से लड़ने के वादे पर सत्ता में आई। उसका कार्यकाल समाप्त होने में कुछ ही महीने बचे हैं, लेकिन, हम भ्रष्टाचार को सिर्फ बढ़ते हुए देख रहे हैं। किसानों की दुर्दशा का मुद्दा सबसे बड़ा है। उनको फसलों के उचित दाम नहीं मिलते। किसान कर्ज के नीचे दबते जा रहे हैं, जिससे खुदकुशी की वारदातें तेजी से बढ़ रही हैं।