गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिया है कि वह हरिद्वार में जल्द 13 सीवेज शोधन संयंत्रों का निरीक्षण पूरा कर संचालन शुरू करे। गंगा में प्रदूषण फैला रहे होटलों, आश्रम और धर्मशालाओं का सीवेज रोकने के भी आदेश दिए गए हैं। जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमसी मेहता मामले में यह आदेश दिया है।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बताया कि हरिद्वार में सीवेज प्रदूषण रोकने के लिए कुल 13 सीवेज शोधन संयंत्रों में से सिर्फ पांच का संचालन हो रहा है। एक एसटीपी जल्द ही शुरू हो गया है। वहीं अन्य पांच का निरीक्षण किया जाना है। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक यह काम पूरा हो जाना चाहिए।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कहा कि गोमुख से हरिद्वार तक ऐसे 490 होटल, आश्रम और धर्मशालाएं, जो गंगा में सीधे सीवेज प्रदूषण की जिम्मेदार थे, उनमें से अधिकांश का सीवेज प्रदूषण रोक दिया गया है। सिर्फ 31 प्रतिष् ठानों के सीवेज प्रदूषण पर लगाम लगाना बाकी है। उत्तराखंड सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि गंगा के लिए दिए गए फैसले का अनुपालन किया जा रहा है। पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई में स्थिति रिपोर्ट पेश करें।
वहीं उत्तर प्रदेश में हरिद्वार सीमा से कानपुर तक गंगा प्रदूषण के लिए दिए गए फैसले के अनुपालन की स्थिति रिपोर्ट भी एनजीटी ने सरकार से पेश करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में गंगा प्रदूषण मामले की सुनवाई 6 फरवरी को की जाएगी। एनजीटी ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के भीतर गंगा में प्रदूषण रोकने के लिए 10 दिसंबर, 2015 और 2016 में अपना फैसला सुनाया था।