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बिहार चुनाव 2025: नालंदा में नीतीश की साख कायम, पर स्थानीय मुद्दों पर असंतोष भी; जातीय समीकरण बनेंगे फैक्टर

Tue, 28 Oct 2025 05:06 AM IST
शिवम गर्ग कुमार निशांत

सार

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव 2025 में नीतीश कुमार के गढ़ नालंदा में जनता विकास पर भरोसा जता रही है, पर स्थानीय विधायकों के कामकाज को लेकर असंतोष भी दिख रहा है। जानें सीटवार समीकरण और प्रमुख उम्मीदवार।

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गढ़ माने जाने वाला नालंदा जिला फिर चुनावी चर्चा के केंद्र में है। विकास योजनाओं और सुशासन के मॉडल पर जनता अब भी नीतीश की साख पर भरोसा जताती दिख रही है, लेकिन स्थानीय विधायकों के कामकाज और जवाबदेही को लेकर नाराजगी भी साफ झलक रही है।

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नालंदा जदयू का गढ़ रही है। 2020 में सात में से पांच सीटों पर जदयू का कब्जा था, एक सीट भाजपा और एक राजद के पास गई थी। इस बार भी पार्टी नीतीश के शासनकाल की सड़कों, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधारों को गिना रही है, लेकिन जनता में स्थानीय विधायकों की निष्क्रियता और दूरी को लेकर नाराजगी भी साफ दिखाई देती है। राजगीर के पास सलेमपुर-राजगीर चार लेने हाईवे, नालंदा यूनिवर्सिटी विस्तार व पर्यटन परियोजनाओं का उद्घाटन हाल ही में हुआ है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी और अधूरी योजनाओं पर लोगों में असंतोष है।

पहले चरण में 6 नवंबर को होने वाले चुनाव में जिले की हिलसा सीट पर मुकाबला दिलचस्प है। यहां जदयू के कृष्ण मुरारी शरण और राजद ने शक्ति सिंह यादव आमने-सामने हैं। वहीं, नालंदा सीट से सात बार के विधायक श्रवण कुमार 8वीं बार किस्मत आजमा रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार हैं। हरनौत से नौ बार के विजेता हरिनारायण सिंह इस बार दसवीं जीत की कोशिश में हैं। उनके सामने कांग्रेस के अरुण कुमार हैं। इस्लामपुर में जदयू के रुहेल रंजन और राजद के राकेश कुमार रोशन में टक्कर है, जबकि राजगीर, अस्थावां और बिहारशरीफ में भी मुकाबला बहुकोणीय बना हुआ है। कुल मिलाकर, नालंदा में साख और विकास की परीक्षा है।
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जातीय संतुलन तय करेगा नतीजे
2020 के चुनाव में हिलसा सीट पर जीत का अंतर सिर्फ 12 वोट का था। जदयू के कृष्ण मुरारी ने राजद के शक्ति सिंह को कांटे की टक्कर में हराया था। इस बार भी मुकाबले में यही दोनों हैं, इसलिए यहां एनडीए बनाम महागठबंधन के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई है। यादव, कुशवाहा, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं का संतुलन यहां की राजनीति की दिशा तय करेगा। राजद कार्यकर्ता जनता से विधायकों की दूरी का मुद्दा उठा रहे हैं तो जदयू राज्य में काम के भरोसे जीत का नारा लेकर मैदान में है।

नए मतदाताओं का रुख स्पष्ट नहीं
नालंदा में कुशवाहा, यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं का संतुलन निर्णायक है। युवा और प्रथम बार वोट देने वाले मतदाताओं का रूप स्पष्ट नहीं है, पर रोजगार और शिक्षा उनके अहम मुद्दे हैं। हालांकि महिलाएं उज्ज्वला योजना, जल-जीवन-हरियाली और आत्मनिर्भरता योजनाओं का जिक्र करते हुए नीतीश सरकार के प्रति भरोसा जताती दिख रही हैं।

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