मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई भावांतर योजना खत्म करने की बात कही है। वह इसे ठीक बता रहे है। कृषि मंत्री सचिन यादव का कहना है कि किसानों को इस योजना से नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि किसानों से पहले बात की गई तभी ये फैसला लिया गया।
वहीं सरकार के इस फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह विरोध कर रहे हैं। शिवराज ने योजना के बंद किए जाने पर आंदोलन करने की धमकी दी और साथ ही सीएम कमलनाथ को पत्र भी लिखा है।
शिवराज ने योजना के बंद किए जाने पर आंदोलन करने की धमकी दी और साथ ही सीएम कमलनाथ को पत्र भी लिखा है। उनका कहना है, "किसानों के साथ हम धोखा नहीं होने देंगे। इनके हित और अधिकार की लड़ाई हम लड़ेंगे। आवश्यकता हुई तो हम किसानों के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।"
वहीं कृषि मंत्री सचिन यादव का कहना है कि किसानों को इस योजना से नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि किसानों से पहले बात की गई तभी ये फैसला लिया गया। उनका कहना है, "भाजपा की योजनाएं किसानों पर केंद्रित नहीं थीं। जब से योजना शुरू हुई तभी से किसानों के उत्पादों के दाम गिरने लगे। यहां तक कि सरकार का समर्थन भी किसानों को ही नुकसान पहुंचा रहा था। इसलिए हमने योजना खत्म करने का फैसला लिया।"
शिवराज का कहना है कि अन्नदाता के पुरुषार्थ से ही देश-प्रदेश के अन्न के भण्डार भरे हैं। इनके परिश्रम और पसीने की पूरी कीमत इन्हें न मिले, तो यह उनके साथ घोर अन्याय है। मेरा मानना है कि भावांतार भुगतान योजना के बंद होने से किसान को बड़ा नुकसान होगा। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार भावांतार भुगतान योजना में कोई सुधार करना चाहती है, तो हमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार जो इधर-उधर की बातें कर रही है, इससे उनकी नीयत किसान को पैसे देने की नहीं लग रही है। हम ऐसा नहीं होने देंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा, "सरकार केवल पुरानी सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं को बदलने की दृष्टि से काम कर रही है। यह लोगों के लिए अनुचित है। वह कैसे सबकुछ अंधे होकर बदल सकते हैं? अगर वह किसानों को सही कीमत नहीं देते तो हम फरवरी में आंदोलन करेंगे।"