महाराष्ट्र में हो रहे विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों को बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी बीच मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने लाउडस्पीकरों को लेकर बयान दिया है। राज ठाकरे ने कहा कि, महाराष्ट्र की मस्जिदों से सभी लाउडस्पीकर हटा दिए जाने चाहिए। यही नहीं मंदिरों में भी 365 दिन बज रहे स्पीकरों को हटा देना चाहिए।
लाउडस्पीकर से लोगों को परेशानी-राज ठाकरे
शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि, महाराष्ट्र की मस्जिदों से सभी लाउडस्पीकर हटा दिए जाने चाहिए। लोगों के लिए परेशानी पैदा करने वाले लाउडस्पीकर नहीं बजने दिए जाएंगे। अगर वे मंदिर में हैं और 365 दिन बज रहे हैं, तो उन्हें भी हटा दिया जाना चाहिए। लेकिन मंदिरों में हर समय लाउडस्पीकर नहीं बजाए जाते। लोग बस मंदिर जाते हैं, भगवान के पैर छूते हैं और एक मिनट में वापस आ जाते हैं।
राज ठाकरे ने कहा कि, जब बालासाहेब ठाकरे के बेटे मुख्यमंत्री थे, तब मैंने लाउडस्पीकर का विरोध किया था। मेरे 17,000 कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किए गए थे। मैंने बस इतना कहा था कि अगर लाउडस्पीकर नहीं हटाए गए, तो हम मस्जिदों के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे।
इसे पहले एक रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा था कि, महाराष्ट्र में रेलवे में वैकेंसी निकली थी। लेकिन, एग्जाम देने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार से लोग आए। हमारे आंदोलन के बाद हमारे लोगों को पता चला कि ये नौकरी हमारे लिए हैं। आंदोलन के बाद ममता बनर्जी जब रेल मंत्री बनीं तो उन्होंने मराठी में एग्जाम लिखने का मौका दिया, जिसके बाद हजारों मराठी लोगों को नौकरी मिली। यह काम सरकार था, लेकिन हमने सत्ता से बाहर रहकर यह काम किया।
राज ठाकरे ने शरद पवार पर लगाया आरोप
महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए एक रैली को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने एनसीपी (सपा) अध्यक्ष शरद पवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने 1999 से महाराष्ट्र में जातिवाद को बढ़ावा दिया ताकि राजनीतिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा शरद पवार ने महाराष्ट्र में जातिवाद की शुरुआत की। राजनीतिक फायदे के लिए समाज में नफरत फैलायी गई। पहले ब्राह्मणों और मराठों के बीच जातिवाद को बढ़ावा दिया जाता था, अब मराठों और ओबीसी के बीच भी ऐसा किया जा रहा है। इसके साथ ही ठाकरे ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में जातिवाद समाज में दरार पैदा कर रहा है।
राज ठाकरे का उदाहरण तर्क
इसके साथ ही राज ठाकरे ने एक उदाहरण देते हुए कहा चंद्रकांत पाटिल या किशोर शिंदे पर विचार करें, लेकिन उनकी जाति देखकर नहीं, उनके काम के आधार पर करें। महाराष्ट्र में जातिवाद की राजनीति का कारण शरद पवार हैं। एनसीपी (1999 में) के गठन के बाद से राज्य में जातिवाद बढ़ा है। एनसीपी (सपा) ने समाज में फूट और मतभेद पैदा किए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने विभिन्न जातियों को एकजुट कर स्वराज्य की स्थापना की थी, लेकिन अब राज्य जातिवाद की चपेट में आ गया है।