मेट्रो स्टेशन मैनेजर और सीआईएसएफ के एसआई के बीच हुए विवाद के बाद मेट्रो सेवा बाधित करने वाले मेट्रोकर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दिल्ली मेट्रो रेल कोरपोरेशन ने यह जानकारी मंगलवार को हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश करते हुए दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की खंडपीठ के समक्ष पेश रिपोर्ट में दिल्ली मेट्रो ने कहा कि मेट्रो सेवा बाधित करना न केवल दुराचार है, बल्कि सेवा नियमों का भी उल्लंघन है। दिल्ली मेट्रो ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के पांच जुलाई के आदेश के मद्देनजर पेश की है, जिसमें कहा गया था कि सेवा बाधित करने वाले कर्मियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि द्वारका सेक्टर 21 पर 31 मई को हुए विवाद के बाद करीब आधा घंटा मेट्रोकर्मियों ने सेवा बाधित कर दी थी। इसके खिलाफ पूरन चंद आर्य ने अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौधरी के जरिये याचिका दायर कर कार्रवाई की मांग की थी। याचिका पर अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।