पुलिस ने कहा कि 50 वर्षीय अरविंदजी और सीपीआई (माओवादी) विद्रोही समूह के अन्य शीर्ष नेताओं ने बुद्धपहर क्षेत्र में लंबे समय से शिविर लगाया हुआ था। पिछले एक साल से उसे पकड़ने के लिए ऑपरेशन चल रहा था। इसी कोशिश में पिछले साल जनवरी में 6 सीआरपीएफ के जवान सहित 2 असिस्टेंट कमांडर घायल भी हो गए थे। यह हादसा तब हुआ जब उस इलाके में सीआरपीएफ जवान जाने की कोशिश कर रहे थे, जहां वह छिपे हुए थे। लेकिन तभी माओवादियों ने ब्लास्ट कर दिया था।
उन्होंने कहा कि अरविंदजी माओवादी (सीपीआई) ग्रुप को लीड करता था। वह बहुत पढ़ा लिखा और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स था। अरविंदजी की झारखंड, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और बिहार पुलिस को तलाश थी। अरविंदजी पर लोगों को मारने और सिक्योरिटी फोर्स पर सबसे ज्यादा हमले के आरोप थे। बता दें कि 2016 में उनके करीबी बाल्केश्वर ऊर्फ संदीपदा ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। बाल्केश्वर अरविंदजी के बाद दूसरे नंबर का कमांडर था। इसके बाद माओवादियों को एक बड़ा झटका लगा था।