फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चुनाव आचार संहिता: कॉलर ट्यून, एसएमएस और रिंगटोन से प्रचार पड़ सकता है भारी

Mon, 22 Oct 2018 05:27 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
demo
विज्ञापन

राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम और तेलंगाना राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो चुकी है। अगर कोई राजनीतिक दल का प्रत्याशी बिना अनुमति के किसी के घर पर झंडा, बैनर या पोस्टर लगाता है, या फिर मोबाइल पर एसएमएस भेज कर वोट देने की अपील करता है, तो यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।

विज्ञापन


चुनाव आयोग को देनी होगी अनुमति की कापी
भारतीय निर्वाचन आयोग के पूर्व कानूनी सलाहकार एसके मेहंदीरत्ता ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि अगर कोई प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान बिना पूछे किसी के निजी मकान या प्लॉट पर किसी राजनीतिक दल का झंडा, बैनर या पोस्टर लगाता है, तो यह चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में आईपीसी की धारा 171एच के तहत कार्रवाई की जा सकती है। किसी भी प्राइवेट प्रॉपर्टी पर चुनाव प्रचार सामग्री लगाने के लिए मकान मालिक की लिखित अनुमति लेना आवश्यक है। यह नियम समर्थकों, एजेंट और कार्यकर्ताओं पर भी लागू होगा। साथ ही, अनुमति की फोटोकापी चुनाव अधिकारी को तीन दिन के भीतर सौंपनी होगी।

सरकारी भवनों पर नहीं लगा सकते झंडे-पोस्टर
वहीं अगर सार्वजनिक जगहों पर झंडा, बैनर या पोस्टर लगाता है, तो इसके लिए उम्मीदवार को चुनाव आयोग से पूर्वानुमति लेनी आवश्यक है। सरकारी भवनों पर संपत्ति विरूपण होने पर संबंधित विभाग के साथ-साथ राजनीति दल और उसके उम्मीदवार को चुनाव आयोग नोटिस जारी कर कर सकता है। सरकारी भवनों पर किसी प्रकार की चुनाव सामग्री कट-आउट, होर्डिंग इत्यादि लगाना आचार संहिता का उल्लंघन है।

विज्ञापन
विज्ञापन

पार्टी ऑफिस पर लगा सकते हैं केवल एक झंडा

मेहंदीरत्ता के मुताबिक राजनीतिक दलों को पार्टी ऑफिस खोलने के लिए भी चुनाव आयोग से लिखित मंजूरी लेना आवश्यक है। वहीं यह ऑफिस धार्मिक स्थल, शैक्षिक संस्थान और अस्पताल से 200 मीटर की दूरी पर होना चाहिए। इसके अलावा राजनीतिक दल के दफ्तर के बाहर पार्टी के निशान के साथ केवल एक झंडा, एक पोस्टर और 4x8 फुट तक का बैनर ही लगाया जा सकता है। इसके अलावा चुनावी सभा, चुनावी जुलूस और प्रचार वाहन पर झंडा लगाने के लिए निर्वाचन कार्यालय से अनुमति लेना जरूरी है।

आचार संहिता के तहत दोपहिया वाहन पर एक झंडा और चार पहिया वाहन पर एक पोस्टर, एक बैनर और एक झंडा लगाया जा सकता है। साथ ही, किसी एक जगह पर वाहन खड़े रखने की बजाय प्रत्याशियों को घूमते वाहनों में लाउड स्पीकर से चुनाव प्रचार करना आवश्यक है।

कॉलर ट्यून, रिंगटोन और एसएमएस प्रचार का हिस्सा
पूर्व कानूनी सलाहकार मेहंदीरत्ता का कहना है कि अगर टेलिकॉम कंपनियां किसी राजनीतिक दल या प्रत्याशी की वोटरों को लुभाने वाली कॉलर ट्यून और रिंगटोन सुनाती हैं, तो यह प्रचार का हिस्सा माना जाएगा। राजनीतिक दलों की तरफ से भेजे जाने वाले एसएमएस भी प्रचार का हिस्सा होते हैं, जिनके लिए आयोग की पूर्वानुमति आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल, 2004 को दिए दिशा-निर्देशों में इसे प्रचार का हिस्सा माना है। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने नमो कॉलर ट्यून और 2016 में उत्तर प्रदेश चुनावों के दौरान ‘मेरा देश बदल रहा है’ जैसी रिंगटोन जारी की थी, जिस पर कई विपक्षी राजनीति दलों ने चुनाव आयोग से आपत्ति जाहिर करते हुए चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें