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आधार कार्ड को जरूरी बनाने के सरकारी फैसलों के बीच
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक तल्ख सवाल किया कि क्या जिनके पास आधार नहीं है वे वजूद में ही नहीं हैं? बता दें कि देश में करीब 70 लाख लोग बेघर हैं।
सर्वोच्च अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने बताया कि रैनबसेरे में रहने से पहले लोगों को कोई पहचान पत्र दिखाना होता है जिसमें आमतौर पर लोगों से आधार दिखाने के लिए कहा जाता है। इस पर न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि क्या जिनकेपास आधार नहीं है वे वजूद में नहीं हैं? पीठ ने कहा कि यदि आधार के लिए पता जरूरी है, तब तो बेघरों का आधार बन ही नहीं सकता। क्या इस कड़कड़ाती ठंड में जरूरतमंद लोगों से रैनबसेरे में शरण लेने के लिए आधार मांगा जाएगा।
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इसके जवाब में मुख्य सचिव ने कहा कि आधार जरूरी नहीं है, कोई अन्य पहचान पत्र दिखाने से भी रैनबसेरे में शरण ली जा सकती है। यूपी सरकार की ओर से यह भी कहा कि रैनबसेरे में आने वाले अधिकतर लोग फ्लोटिंग पॉपुलेशन का हिस्सा होते हैं। अदालत के निर्देश पर मुख्य सचिव बुधवार को पेश हुए थे। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी जानना चाहा किकितने लोगों के पास आधार हैं। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि करीब 90 करोड़ लोगों के पास आधार है।