एक तरफ जहां कांग्रेस कार्यकर्ता राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बाद झारखंड और महाराष्ट्र के चुनाव परिणामों से बेहद उत्साहित हैं। तो दूसरी तरफ दिल्ली चुनावों के बीच कई कांग्रेसी दिग्गज उसका साथ छोड़ रहे हैं। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी में इस समय ऐसे लोगों का बोलबाला हो गया है, जो यहां की स्थानीय राजनीति को बेहतर ढंग से नहीं समझते।
उनका कहना है कि पार्टी को ऐसे लोगों को हटाकर ऐसे जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देना चाहिए, जो दिल्ली की नब्ज को बेहतर ढंग से समझते हैं। लेकिन इन कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी गई, जिसके बाद इन्होंने पार्टी छोड़ दी।
कांग्रेस छोड़ आम आदमी पार्टी का दामन थामते हुए बदरपुर के पूर्व विधायक राम सिंह नेताजी ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व इस वक्त जमीनी कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुन रहा है। पार्टी ने पीसी चाको को प्रदेश प्रभारी बना रखा है, जो दिल्ली को नहीं समझते हैं। वे उम्मीदवारों के सही चयन से लेकर चुनावी कार्यक्रमों में भी जनता को नहीं जोड़ पाते हैं।
ऐसे में पार्टी को उन्हें इतने महत्वपूर्ण पद पर क्यों जगह देनी चाहिए, यह उन्हें समझ नहीं आता। ध्यान रहे कि पहले भी राम सिंह नेताजी ने पीसी चाको के खिलाफ अभियान छेड़ा था, लेकिन उस समय भी पार्टी ने उनकी बात को महत्व नहीं दिया था।
चाको के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता उस समय भी लामबंद हो गये थे, जब वे लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी से गठबंधन करना चाह रहे थे। तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित और उनके सभी सहयोगी चुनाव में अकेले उतरना चाहते थे।
उनका कहना था कि एक बार आम आदमी पार्टी को समर्थन देने के कारण ही पार्टी दिल्ली में कमजोर हो गई। अगर दोबारा समर्थन दिया जाता है, तो इससे पार्टी दिल्ली में खत्म हो जाएगी। इसलिए चुनाव में हार मिले या जीत, भविष्य की मजबूती के लिए पार्टी को चुनाव में अकेले दम पर ही उतरना चाहिए।
वहीं, पीसी चाको चुनावी जीत को ध्यान में रखकर आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के पक्ष में थे।
लेकिन आखिरकार पार्टी नेतृत्व ने शीला दीक्षित की बात को महत्व दिया और आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो पाया। कांग्रेस इस चुनाव में कोई सीट भले ही न जीत सकी हो, लेकिन उसने पांच सीटों पर दूसरे स्थान हासिल करके आम आदमी पार्टी को सकते में डाल दिया था।
शीला दीक्षित मंत्रिमंडल में एक महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुके एक पार्टी नेता का कहना है कि यह सही है कि राम सिंह नेता जी पार्टी के साथ गंभीरता के साथ जुड़े हुए थे। बदरपुर से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद भी वे शीला दीक्षित के साथ मजबूती के साथ खड़े रहते थे।
ऐसे में पार्टी को इन कार्यकर्ताओं की बात सुननी चाहिए। ऐसे कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पार्टी को कमजोर करती है।
इसी तरह पार्टी के पूर्व सांसद और पार्टी में पूर्वांचल हिस्से के एक अच्छे नेता महाबल मिश्रा के बेटे विनय मिश्रा ने भी सोमवार को आम आदमी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। उन्होंने भी पार्टी पर यही आरोप लगाया कि वहां कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही है। जिन हिस्सों में जो नेता मजबूत पकड़ रखते हैं, उन्हें वहां से मौका दिया जाना चाहिए।
लेकिन पार्टी ऐसा निर्णय नहीं ले रही है, जिसके कारण उनके जैसे हमेशा से कांग्रेसी रहे लोगों को भी बाहर संभावनाएं तलाशनी पड़ रही हैं।