भाजपा पूरी कोशिश कर शाहीन बाग को एक चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए शाहीन बाग को राष्ट्र्विरोधियों और आतंकियों का अड्डा बताने के साथ-साथ सरकार बनने पर यहां ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने और एक घंटे में शाहीन बाग को ‘खाली कराने’ जैसे भड़काऊ बयान दिए जा चुके हैं। अमित शाह ने वोट का करंट शाहीन बाग तक पहुंचाने की अपील की, तो पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पूर्वी दिल्ली की रैली के दौरान इसे देश तोड़ने वालों की सोच की एक प्रयोगशाला करार दे दिया।
लेकिन क्या शाहीन बाग एक चुनावी मुद्दा बन पाया? दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आठ फरवरी शनिवार को राजधानी के मतदाता वोट डालेंगे। क्या तब उनके दिमाग में शाहीन बाग का मुद्दा छाया रहेगा? प्रधानमंत्री की रैली से बाहर निकल रहे लोगों से बातचीत करने के बाद यह बात समझ में आती है कि यह मुद्दा एक वर्ग के लोगों पर असर डाल रहा है।
लेकिन ठहरिये! इस मुद्दे पर एक तस्वीर और भी है, जिसे कोई भी निष्कर्ष निकालने के पहले ध्यान में रखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री के रैली स्थल सीबीडी ग्राउंड से लगभग छह किलोमीटर दूरी पर सोमवार को ही अरविंद केजरीवाल ने त्रिलोकपुरी विधानसभा क्षेत्र में अपने प्रत्याशी रोहित कुमार महरौलिया के लिए रोड शो किया। रोड शो के दौरान लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। जगह-जगह पर उनका स्वागत किया गया।
भीड़ में भारी संख्या में एससी/एसटी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शामिल थे। इन लोगों से बातचीत करने पर लगता है कि एक बड़ा वर्ग दिल्ली सरकार के किए गए काम से प्रभावित है और इस चुनाव में उनका समर्थन आम आदमी पार्टी को जा सकता है।
चौधरी शमसुद्दीन अहमद (70 वर्ष) बहुत स्पष्ट बताते हैं कि उनका वोट आम आदमी पार्टी को जा रहा है। वजह पूछने पर अहमद ने बताया कि इस सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए बहुत काम किया है। केजरीवाल को वोट देने के लिए सिर्फ उनका काम ही वजह बन रहा है।
वे किसी भी अन्य कारण से प्रभावित नहीं हैं। क्या वे शाहीन बाग मुद्दे के कारण आम आदमी पार्टी को सपोर्ट कर रहे हैं? इस सवाल के जवाब में उनका जवाब बिल्कुल स्पष्ट है- नहीं। उनके समर्थन की सबसे बड़ी वजह वो काम है जिसे सरकार ने गरीब लोगों के लिए किया है।
दिल्ली में हो रहे CAA विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े एक व्यक्ति का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय इस बात को बखूबी समझ रहा है कि भाजपा लगातार इस मुद्दे को उछालने की कोशिश कर रही है। उसकी नियत भांपकर ही अल्पसंख्यक समाज पूरी तरह शांत है। तीन बार गोलियां चलने की उकसावे वाली घटना के बाद भी वह कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहा है।
उसे पता है कि कोई भी नकारात्मक प्रतिक्रिया देने से मामला उलटा पड़ सकता है। शाहीन बाग को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कामयाब हो सकती है। यही कारण है कि अल्पसंख्यक मतदाता खामोश है। उनका कहना है कि यह कोशिश आगे भी बरकरार रहेगी।
त्रिलोकपुरी के ब्लॉक 15 के पास से होकर केजरीवाल का रोड शो गुजरने के दौरान राम रतन ने बताया कि चौराहे के ठीक कोने में बने पार्क के पास एक विद्यालय है। वे स्वयं इसी स्कूल से पढ़े हैं, लेकिन कभी भी उन्हें यहां बैठने के लिए बेंच-डेस्क नहीं मिली।
आज उनके बच्चे इसी स्कूल में स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई कर रहे हैं। लगभग 45 साल के हो चुके राम रतन का सवाल था कि उनकी पूरी जिंदगी में यह पहली सरकार आई है जिसने उनके जैसे गरीब लोगों के बच्चों के लिए कुछ किया है, अब उन्हें इनका नहीं तो किसका समर्थन करना चाहिए?
सुशील चौधरी की उम्र लगभग 25 साल है। वे कनाट प्लेस में एक प्राइवेट कंपनी में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि अरविंद केजरीवाल सरकार के कारण उनकी सेलरी अब बढ़कर लगभग 15 हजार रुपये मासिक हो चुकी है।
उनका मानना है कि आज तक गरीब वर्ग के लिए काम करने वाली इस तरह की कोई सरकार नहीं आई। यही वजह है कि उनका वोट अरविंद केजरीवाल को जा रहा है।