कोलकाता शहर में एक डायल 100 का मिसयूज अधिक होने का मामला सामने आया है। यहां शहर के बागुई में एक 16 वर्षीय किशोरी ऑटो चालक के क्रोध का शिकार हो गई। लेकिन उसने पुलिस की मदद नहीं ली, हालांकि वहीं सड़क पर मौजूद लड़के ने तुरंत 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी।
बिधाननगर सिटी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक डायल 100 नंबर पर संकट में होने वालों लोगों की संख्या की तुलना में ज्यादातर शरारती तत्वों की कॉल आती हैं। इसलिए कभी-कभी इससे सीरियस घटनाओं को कम महत्व मिलता है। नकली कॉलों में प्रेमी से दुखी गर्लफ्रेंड लड़ाई करने के बाद 100 नंबर पर फोन करते हैं, कभी-कभी नशे में धुत पुरुष या छोटे बच्चे रात को हंसी के लिए कॉल कर देते हैं। यह बिधाननगर सिटी पुलिस के कंट्रोल रूम में घटने वाली एक नियमित कहानी है, जहां ऑपरेटर फोन पर 100 नंबर कॉल का जवाब देते हैं।
उन्होंने बताया कि टोल-फ्री आपातकालीन 100 नंबर का पहला उद्देश्य कॉलर को जवाब देने के साथ यथाशीघ्र सहायता उपलब्ध कराना होता है। हालांकि 1,000 से अधिक शरारत कॉल आती हैं, ऑपरेटरों का काम तीन पालियों में होता है।
छुट्टियों के दौरान 9 बजे के बाद हमारे नियंत्रण कक्ष में नकली कॉल की भरमार होती है। चूंकि हम नकली कॉलर को फिल्टर नहीं कर सकते हैं। हालांकि संकट की स्थिति, सांप्रदायिक तनाव, आग या चुनाव के दौरान हम सैकड़ों वास्तविक कॉल भी प्राप्त करते हैं, तब समस्या बढ़ जाती है।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह भी एक चौंकाने वाली बात है कि फोन सेल्समैन और मरम्मत करने वाले लोग कनेक्शन का परीक्षण करने के लिए टोल फ्री नंबर का उपयोग करते हैं। हालांकि डायल 100 की सफलता की कहानियां भी कम नहीं है।