उत्तर प्रदेश की सीएम सिटी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की करतूत की वजह से चर्चा में है। कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से करीब 40 मासूमों सहित 62 लोगों की जान चली गई है। ऐसा ही कुछ हाल हरियाणा की सीएम सिटी करनाल के मेडिकल कॉलेज का भी है। इस मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि एक बाबा की गर्दन में घुसी कैंची को निकालने में 11 घंटे लग गए।
यही नहीं, बाबा को चेकअप के नाम पर कभी नए भवन तो कभी पुराने भवन भेजा गया। हालांकि डाक्टरों का कहना है कि बाबा का केस बहुत संवेदनशील था। इस कारण ऑपरेशन में समय लगा।
जानकारी के मुताबिक, बाबा आत्मनाथ गिरी जनकपुरी के एक अखाड़े में रहते हैं। शनिवार सुबह बाबा के एक चेले ने कैंची से बाबा पर हमला कर दिया। कैंची बाबा के गर्दन के आरपार होकर फंस गई। बाबा की चीख सुनकर आसपास के लोग आ गए और बाबा को इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर गए।
बाबा सुबह छह बजे मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर पहुंचे थे, लेकिन 11 बजे तक वह प्राथमिक उपचार तक के लिए भटकते रहे। जब मामले को मीडिया ने उठाया तो 11 बजे के बाद सिटी थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और बाबा के बयान दर्ज करके इलाज शुरू करवाया।
शाम करीब चार बजे डॉक्टरों की टीम ने बाबा का ऑपरेशन शुरू किया, जोकि डेढ़ घंटे तक चला। शाम करीब साढ़े पांच बजे बाबा की गर्दन से कैंची निकाली गई। इसके बाद बाबा को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। फिलहाल, बाबा की हालात ठीक बताई जा रही है।
बाबा को नहीं मिला स्ट्रेचर
इलाज के लिए सुबह छह बजे अस्पताल पहुंचे बाबा 11 बजे तक इधर-उधर पैदल चक्कर लगाते रहे। इस बीच बाबा को स्ट्रेचर तक नहीं मिला। बाबा को एक्सरे करवाने के लिए ट्रामा सेंटर से करीब 600 मीटर की दूरी पर पुरानी बिल्डिंग में एक्सरे और सीटी स्कैन के लिए पैदल जाना पड़ा। बताया गया कि ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचरों की काफी कमी है। इस कारण गंभीर घायल मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ट्रामा सेंटर में पहुंचाते हैं।
तीन घंटे तक बिजली नहीं होने से नहीं हो पाया एक्सरे
बाबा सुबह छह बजे मेडिकल कॉलेज आ गए थे। 11 बजे तक बाबा का प्राथमिक उपचार तक नहीं किया गया। 11 बजे के बाद बाबा को एक्सरे और सीटी स्कैन के लिए भेजा गया तो वहां तीन घंटे तक बिजली नहीं थी। इस कारण न तो एक्सरे हो पाया न सिटी स्कैन। बिजली आने के बाद सीटी स्कैन और एक्सरे हुआ। जब तक रिपोर्ट नहीं आई तब तक बाबा दर्द से तड़पते रहे।
बाबा की गर्दन में कैंची आरपार हो गई थी। यह बहुत संवेदनशील था। गर्दन में खाने और सांस की नलियां होती हैं। इसी के साथ रीढ़ की भी हड्डी होती है। इस कारण इसका सावधानी पूर्वक ऑपरेशन किया गया।
-डॉ. जगदीश दुरेजा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल