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छोटी बहू का था जन्मदिन, बड़ी की मन रही थी शादी की सालगिरह और ....

Mon, 26 Jun 2017 12:04 PM IST
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर
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साहेब लाल
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सैर-सपाटा, मौज-मस्ती और हर्ष-उल्लास में शनिवार का दिन बीता था। शाम को गोरखनाथ मंदिर से लौटकर परिवार रेस्टोरेंट जाने की तैयारी में था। तभी कश्मीर से शुभा शुक्ला के मोबाइल पर एक कॉल आई और इसके साथ ही खुशियों में डूबे घर पर आतंक का वज्रपात हो गया।
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मोबाइल पर दूसरी ओर सीआरपीएफ के कमांडेंट थे। फोन शुभा शुक्ला ने उठाया, लेकिन कमांडेंट ने उन्हें बेटों से बात कराने के लिए कहा। इस पर शुभा ने तीसरे बेटे विभ्राट को मोबाइल थमा दिया। हालांकि, इस बीच शुभा को अनहोनी की आशंका ने घेर लिया था। अभी दो घंटे पहले तो उनकी पति साहब से बात हुई थी। अब उनके कमांडेंट का फोन क्यों आया था?

अभी वह इसी सोच में डूबी थीं तभी विराट की आंखों से आंसू झरने लगे। चंद मिनट पहले तक खुशियों में डूबे घरौंदे में अब चीत्कार गूंज रही थी। खुशी से चमकती आंखें गम से डबडबा चुकी थीं। विभ्राट ने बताया कि बड़ी भाभी ज्योति शुक्ला की शादी की सालगिरह और घर की नई बहू रागिनी का बर्थडे एक साथ पड़ा था। इसलिए शनिवार सुबह से ही घर में जश्न का माहौल था। शाम को पापा से बात हुई थी। उन्होंने खुद फोन किया था। उन्हें जानकारी थी कि हम लोग गोरखनाथ मंदिर घूमने गए हैं।
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लौटने के बाद हमने उन्हें फोन नहीं किया तो उन्होंने खुद कॉल लगा ली थी। फोन पर उन्होंने डांट भी पिलाई थी। घूमकर घर लौटने के बाद फोन करके न बताने पर वह नाराज थे। उन्होंने कह रखा था कि कहीं बाहर जाने के बाद घर लौटने पर तुरंत उन्हें फोन करके बताया जाए। इस बार हमारी ओर से उन्हें सूचना देने में हम चूक गए थे। थोड़ी डांट के बाद उनका प्यार भी बरसा था।
इसके दो घंटे बाद वह कॉल आई थी जिसके खत्म होने से पहले परिवार की खुशियां भी खत्म हो गई थीं। कमांडेंट ने मां से नहीं हमसे बात कराने को कहा था। मैंने फोन लिया तो उधर से वह रोने लगे। कहा, अपने देश के लोग ही देश को खोखला करने में जुटे हुए हैं। इसके साथ ही पापा के शहीद होने की उन्होंने जानकारी दी।

...तो पहले ही हो गया था अनहोनी का अहसास
शहीद साहब शुक्ल के छोटे बेटे विभ्राट ने बताया कि आमतौर पर पापा रिश्तेदारों को जल्दी फोन नहीं करते थे, लेकिन शनिवार को उन्होंने दोनों मौसी, मामी, नाना समेत अपने दोनों समधियों से बात की थी। आमतौर पर ऐसा नहीं होता था, लेकिन लगा कि पापा को कि पहले से ही अनहोनी का अहसास हो गया था। इससे पहले जब वह मई में गांव आए थे तब वह मुझे यह कहते हुए खेत दिखाने ले गए थे कि क्या पता, कब कौन सी गोली जान ले जाए, ऐसे में अपने खेत देख लो। इससे पहले पापा जब भी घर आए, उन्होंने कभी इस तरह की कोई बात नहीं की थी।
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