देश में अपनी अलग मुद्रा चलाना गैर कानूनी है मगर डेरे में उसकी अपनी प्लास्टिक मुद्रा चलती थी, यानि यहां करेंसी में भी राम रहीम का 'सिक्का' है। जो भी व्यक्ति डेरे में आता था उसे अपना हर प्रकार का काम और कारोबार इसी प्लास्टिक मनी से करना होता है।
डेरे में आने वाले को डेरे के काउंटर पर भारतीय करेंसी जमा करवानी होती थी, उसके बदले में उसे उतनी ही नकदी की प्लास्टिक करेंसी मिलती थी। एक रुपये से लेकर हजार रुपये मूल्य तक की यह प्लास्टिक करेंसी डेरा चलाता है। डेरा में कुछ भी खरीदना हो, फाइव स्टार होटल में जाना हो, स्कूल और कॉलेज में फीस भरनी हो तो यही प्लास्टिक करेंसी चलती थी। अगर बस अड्डे से ऑटो रिक्शा में बैठकर डेरा सच्चा सौदा जाना हो तो ऑटो चालक डेरे की करेंसी स्वीकार कर लेता है।
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टोकन के बदले में भारतीय करेंसी
अगर किसी व्यक्ति ने 100 का नोट देकर 60 रुपये का सामान लिया है तो उसे बदले में डेरे की दुकानों से चालीस रुपये की प्लास्टिक मनी ही मिलती थी। वह उससे कुछ भी खरीद सकता है। व्यक्ति जाते समय टोकन के बदले में भारतीय करेंसी ले सकता है। डेरा सच्चा सौदा की योजना था कि डेरा को एमएसजी सिटी में तब्दील किया जाए, क्योंकि डेरा का क्षेत्रफल एक पूरे शहर जितना है।
इसमें स्कूल, कॉलेज, खेल स्टेडियम, फाइव स्टार होटल, कॉलोनियां, मल्टीप्लेक्स सिनेमा हॉल, स्वीमिंग पूल, अस्पताल, जिम, जलघर, बिजली घर, फैक्टरियां वाटर पार्क, बाजार, फल-सब्जी मार्केट की सुविधा है। काफी बडे़ हिस्से में खेती व फलों के बाग भी डेरे में हैं। इसी कारण डेरा सच्चा सौदा एमएसजी सिटी के नाम से अपना अलग शहर बनाना चाहता था। एमएसजी सिटी में उसकी टोकन करेंसी का ही चलन होता। डेरा सच्चा सौदा के लोग डेरा को सिरसा से अलग शहर ही मानतें हैं तो उसे सरसा लिखते हैं।