छात्रा क्लास में पढ़ाई के दौरान हंस रही थी कि टीचर ने उसे क्लास से निकाल दिया। लड़की इस बात से नाराज हो गई और स्कूल की चौथी मंजिल पर जाकर, स्कूल की बाउंड्री पर पैर लटका कर बैठ गई, ऐसे बैठने के दौरान स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। स्कूल के स्टाफ उससे वहीं से उतरने की गुजारिश करने लगे कि तभी उसने छलांग लगा दी और उसकी मौत हो गई। मामला राजस्थान के सीकर का है। सीकर में नेहरू पार्क स्थित एक्सीलेंस स्कूल में 12वीं की छात्रा दीक्षा की स्कूल की चौथी मंजिल से गिरने से मौत हो गई। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि छात्रा ने आत्महत्या की है, वहीं परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए स्कूल प्रशासन पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
स्कूल की प्रिंसिपल ने बताया कि कोर्स पूरा करने के लिए स्कूल में इनदिनों एक्सट्रा क्लास लगाई जा रही है। क्लास के दौरान दीक्षा हंस रही थी। शिक्षक ने उसे डांटा और घर पर फोन कर दीक्षा की शिकायत भी कर दी, लेकिन दीक्षा हंसती रही जिसके बाद शिक्षक ने उसे क्लास से निकाल दिया। छात्रा क्लास से निकलकर चौथी मंजिल पर पहुंची और स्कूल के छज्जे पर जा बैठी और कुछ देर बाद वहां से कूद गई, इससे उसकी मौत हो गई।
जब दीक्षा पैर लटका कर छज्जे पर बैठी थी कि तभी स्कूल की महिलाकर्मी ने उसे बैठे हुए देखा और उसे उतरने को कहा। बार-बार कहने पर बी दीक्षा नहीं उतरी तब महिलाकर्मियों ने उसकी फोटो खींची और प्रधानाध्यापिका को सूचना देने भागीं। दोनों महिला कर्मियों ने प्रधानाध्यापक नेहा व्यास को दीक्षा के बारे में बताया। नेहा व्यास को जैसे ही दीक्षा के बारे में पता चला वह ऊपर भागीं। लेकिन उनके चौथी मंजिल पर पहुंचने से पहले ही छात्रा ने छज्जे से छलांग लगा दी।
छात्रा के पिता ने पुलिस को बताया कि उसकी शिकायत के साथ सुबह 10 बजे स्कूल से फोन आया था। पत्नी को बताया गया कि हम पढ़ा रहे हैं और दीक्षा हंस रही है। उन्होंने स्कूल से निकालने की धमकी भी दी थी। 12 बजे फिर से फोन आया कि दीक्षा गिर गई है, उसे चोट लगी है। स्कूल पहुंचा तो बोले कि दीक्षा को हॉस्पिटल भेजा है। वहां गया तो दीक्षा नहीं मिली। स्कूल लौटा तो बताया गया कि उसकी मौत हो गई है।
वहीं स्कूल की प्रधानाचार्य नेहा ने बताया कि दीक्षा टॉयलेट जाने के बहाने कक्षा से बाहर निकली और स्कूल की चौथी मंजिल पर पहुंच गई। स्कूल भवन के पीछे दो महिलाकर्मियों ने दीक्षा को छज्जे पर पैर लटकाकर बैठे हुए देखा। उन्होंने फोटो ली तो दीक्षा ने मुंह छुपाने की कोशिश भी की। जब तक मैं ऊपर गई, दीक्षा छज्जे से कूद चुकी थी।