बेटी को खुदकुशी के लिए उकसाने वाले पिता की सात वर्ष की सजा हाईकोर्ट ने माफ कर दी है। पिता की अपील पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन अपना पक्ष साबित कर पाने में नाकाम रहा।
यह साबित नहीं किया जा सका कि पिता से झगड़े के कारण ही बेटी ने खुदकुशी की थी। फिरोजाबाद के रामगढ़ निवासी सर्वेश कुमार की जेल अपील पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शैलेंद्र कुमार अग्रवाल ने यह फैसला दिया।
सर्वेश कुमार की शादीशुदा बेटी सुनीता ने तीन जुलाई 2010 को खुदकुशी कर ली थी। इससे करीब 13 वर्ष पूर्व उसकी शादी हुई थी। पति ने सुनीता के पिता पर खुदकुशी के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि शराब और जुए की लत के कारण सर्वेश ने अपनी सारी संपत्ति बेच दी थी और बेटी के घर आकर रहने लगा था।
बेटी की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी, वह पति के साथ किराये का कमरा लेकर मजदूरी करती थी। कुछ जमीन सुनीता के नाम पर थी, जिसके कागजात को लेकर वह बेटी से झगड़ा करता था। उससे पैसे भी मांगता था।
आरोप है कि पिता के उत्पीड़न से आजिज आकर सुनीता ने खुदकुशी कर ली। सत्र न्यायालय ने सर्वेश को बेटी का मानसिक उत्पीड़न करने और उसे खुदकुशी के लिए उकसाने का दोषी करार देते हुए सात वर्ष कैद और तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील हुई। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कहा कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से साबित नहीं हो रहे हैं।