करीब 27 साल पुराने दलित उत्पीड़न और दलित को जिंदा जलाने के मामले में फैसला सामने आया है। ये मामला उत्तर प्रदेश के हाथरस का है, जहां आरोप में घिरे अभियुक्त कुंवरपाल को फांसी की सजा सुनाई गई है। जबिक अन्य 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। इस हत्याकांड में पुलिस ने 37 लोगों को आरोपी बनाया था, जिनमें 12 की मौत हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक 11 मार्च 1990 को वादी हरीशंकर पुत्र बलवंत सिंह जाटव निवासी ग्राम रुदायन थाना सासनी ने रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि उसके गांव में होली के त्योहार के उपलक्ष्य में सायं करीब चार बजे उदयवीर पुत्र चंद्रपाल अपनी जाति के सोनपाल के यहां गुलाल लगाने गया था।
रंग लगाने गया था अपनी जाति के आदमी को
गुलाल लगाकर जब वह घर जा रहा था तो रास्ते में पंडित कुंवरपाल सिंह पुत्र भगवान सिंह के नौहरे से निकलकर कुंवरपाल सिंह, राजेंद्र सिंह, नगेंद्र सिंह पुत्रगण भगवान सिंह, श्यामवीर सिंह, प्रेम सिंह, बनवारी और इंसाफी खां ने उदयवीर को पकड़ लिया। उसे मारापीटा।
उदयवीर किसी प्रकार इन लोगों से छूटकर मोहल्ले की तरफ भागा तो पीछे-पीछे उपरोक्त व्यक्तियों के साथ गांव के अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए। इन लोगों ने हाथों में मशाल लेकर दलितों के मोहल्ले में मकानों में आग लगा दी।
जब लोग आग बुझाने के प्रयास करने लगे तो इन लोगों ने गोलियां बरसा दीं, जिससे लोग किसी प्रकार इन लोगों से जान बचाकर जंगलों की तरफ भाग गए। इस दौरान वादी के भाई दाताराम (52 वर्ष) को गोलियां मारकर इन लोगों ने आग में झोंक दिया, जिससे वह जिंदा जल गए। मामले में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने सीबीसीआईडी को जांच के लिए अधिकृत किया था, जिसने जांच के बाद इस बेहद गंभीर मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था।
लंबे केस में इन 12 लोगों की हो गई मौत
लंबे समय तक चले इस मुकदमे के दौरान आरोप पत्र में शामिल 12 लोगों की हो चुकी है मौत। इनमें गुलाब पुत्र भगवानदास, महेंद्र उर्फ नाथूराम पुत्र सुनहरीलाल, नारायण हरी पुत्र रामगोपाल, रवींद्र पुत्र शांति स्वरूप, मथुरा प्रसाद पुत्र बद्रीप्रसाद, महेंद्र पुत्र राधेलाल, मनोज पुत्र साधु, बनवारी पुत्र साधु, कोमल प्रसाद पुत्र ऋषि कुमार, नेत्रपाल पुत्र ख्यालीराम, श्यामवीर सिंह पुत्र भूरी सिंह, रूपकिशोर पुत्र श्यामलाल आदि प्रमुख थे।