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तेज रफ्तार ने साल 2018 में ली ज्यादा लोगों की जान

Fri, 13 Jul 2018 11:02 AM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला
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दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े 2017 के मुकाबले इस वर्ष अधिक बढ़ गए हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष 30 जून तक कुल 751 दुर्घटनाओं के मामले सामने आए हैं। जबकि बीते वर्ष 30 जून तक ऐसे केवल 715 मामले ही थे। इसका एक मुख्य कारण है अधिक स्पीड में वाहन चलाना। इन दुर्घटनाओं का शिकार ज्यादातर दो पहिया वाहन वाले और पैदल चलने वाले लोग ही होते हैं।

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आंकड़ों के मुताबिक 41 फीसदी मामले हिट एंड रन के थे जो कभी सुलझ ही नहीं पाए। वहीं 18 फीसदी में ऐसे ट्रक शामिल थे जो भारी मात्रा में सामान ढोने का काम करते हैं। 11 फीसदी दुर्घटनाएं तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने से हुईं। गाड़ियों से होने वाली दुर्घनाओं में पाया गया है कि तेज रफ्तार में गाड़ी चलाने वाले लोग यातायात नियमों का भी उल्लंघन करते हैं। कई बार तो उनकी गाड़ी के ब्रेक भी फेल हो जाते हैं। रिकॉर्ड बताते हैं कि 22 फीसदी लोग सड़क पार करते वक्त मारे गए हैं। उन्हीं में से 12 फीसदी लोग तब मारे गए जब वाहनों ने ट्रैफिक सिग्नल तोड़ा।

नीजि कार ड्राइवर ही सबसे ज्यादा लोगों की मौत का कारण बनते हैं और सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं भी उन्हीं के कारण होती हैं। करीब एक तिहाई दुर्घटनाओं के पीछे 25-35 साल की उम्र के ड्राइवर होते हैं। रात 8 बजे से 2 बजे तक तो यातायात नियमों का पालन बिल्कुल भी नहीं होता। इसका कारण है रात के समय सड़क पर पुलिस का कम संख्या में होना। कई जगह तो दूर दूर तक कोई पुलिसकर्मी नजर ही नहीं आते हैं।
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उत्तरी दिल्ली में रात के समय तेज रफ्तार में बिना हेलमेट के बाइक चलाना एक आम बात हो गई है। इनमें से अधिकतर पर तो 3 से अधिक लोग सवार होते हैं। साथ ही सड़कों का ठीक ना होना और अधूरे सड़क कार्यों के कारण भी ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। इसी साल ट्रैफिक पुलिस ने ट्रैफिक सिग्नल को तोड़ने के मामले में 50,691 लोगों को हिरासत में लिया है। लेकिन पुलिस का कहना है कि जितने लोग हिरासत में लिए गए हैं उनसे भी अधिक संख्या में लोग तो पुलिस के हत्थे ही नहीं आए।

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