डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सुरक्षा में महिला कमांडो दस्ता भी हर समय तैनात रहा था जिन्हें डेरा में ही प्रशिक्षित किया गया था। ये दस्ता पिस्तौल और माउजर से लैस रहता था। शाही परिवार की सुरक्षा भी ऐसे ही दस्ते के हाथों में रहती थी। डेरा प्रमुख की सुरक्षा कई लेयर में होती थी। जैड प्लस सुरक्षा के तहत 32 ब्लैक केट कमांडो तैनात रहते थे तो शिफ्ट में कार्य करते थे।
इसके साथ ही पहला घेरा डेरा सच्चा सौदा की ओर से प्रशिक्षित कमांडो का होता था जिनके पास आधुनिक हथियार होते थे। हरियाणा पुलिस का सुरक्षा घेरा भी रहता था। सुरक्षा दस्ते में डेरा की प्रशिक्षित महिला कमांडों भी तैनात रहती थी जिसकी वेशभूषा कमांडो जैसे होती थी। उनकी पैनी नजर चारों ओर रहती थी। पुराने डेरा से लेकर नया डेरा तक सड़कों के दोनों ओर पहरेदार तैनात रहते थे जिनके हाथों में डंडे होते थे।
यातायात संचालन का जिम्मा अन्य सेवादारों के हाथों में होता था। डेरा में किसी भी गेट से प्रवेश किया जाए हर गेट पर तीन प्रकार की तलाशी होती थी। पहले व्यक्ति को मैटल डिडेक्टर मशीन के अंदर से होकर निकलता होता था। इसके बाद हैंड सेट मैटल डिटेक्टर व्यक्ति के चारों ओर घुमाया जाता था। इसके बाद मैन्यूअली चार पांच लोग व्यक्ति की तलाशी लेते थे।
इसके बाद जैसे ही व्यक्ति सत्संग हॉल में प्रवेश करता है तो फिर उसकी पहले की भांति तीन चरणों में तलाशी ली जाती थी। सच खंड हॉल की ओर जाने वाले मार्ग पर महिला कमांडो का दस्ता तैनात रहता था। सत्संग हॉल में डेरा मुखी के चारो ओर कड़ा सुरक्षा घेरा रहता था।
जैड प्लस सुरक्षा के ब्लैक केट कमांडो, हरियाणा पुलिस के जवान, डेरा के प्रशिक्षित कमांडो, महिला कमांडों का अलग-अलग घेरा होता था। इसके साथ ही सुरक्षा कर्र्मी मंच के आगे, मंच के पीछे, मंच के पीछे के भवन की छत पर, श्रद्धालुओं के बीच में जगह जगह मौजूद रहते थे।
महिला श्रद्धालुओं की ओर महिला कमांडो का घेरा रहता था। इस दल में अनेक युवतियां ऐसी थी जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में कई बार गोल्ड हासिल किए थे। उनकी पैनी नजर ब्लैक केट कमांडों से कम नहीं थी। महिला कमांडों का दस्ता हर समय हर स्थान पर डेरा प्रमुख के आसपास ही रहता था।