शाहरुख खान की फिल्म रईस को लेकर विवाद शुरू हो गया है। जिस डॉन की जिंदगी पर यह फिल्म बनी है उसके बेटे ने शाहरुख खान पर 101 करोड़ रुपए का दावा ठोका है। बेटे का कहना है कि शाहरुख की इस फिल्म में उसके पिता की गलत छवि दिखाई गई है।
गैंगेस्टर लतीफ के बेटे मुश्ताक शेख ने कहा है कि शाहरुख की फिल्म में दिखाया गया है कि उनके पिता गैंगेस्टर लतीफ देह व्यापार का धंधा करते थे जो कि सरासर गलत है। इससे उनके परिवार की छवि को खराब हो रही है।
अब शाहरुख को 101 करोड़ देने पड़ेंगे या नहीं यह तो अदालत तय करेगी लेकिन अब चर्चा यह शुरू हो गई है कि आखिर गैंगेस्टर अब्दुल लतीफ कौन था जिसकी जिंदगी पर फिल्म बनाई जा रही है और उसकी भूमिका शाहरुख जैसे दिग्गज एक्टर निभा रहे हैं? आगे पढ़े डॉन लतीफ के बर्बर अपराधों से लेकर उसकी दरियादिली तक की पूरी कहानी।
स्कूल जाने की उम्र में ही बेचने लगा था शराब
गुजरात के अमदाबाद में पला-बढ़ा अब्दुल लतीफ कच्ची उमर से ही अवैध शराब बेचने लगा था। वह स्कूल की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी नहीं शराब का कारोबार बढ़ाने की तैयारी करता था। उसे शराब के धंधे का चस्का तब लगा जब वह जुएं के फड़ों में शराब की सप्लाई करना शुरू किया।
जुंए के फड़ों में शराब की सप्लाई करते-करते प्रदेश के राजनीतिक लोगों से हुई और फिर इसके बाद लतीफ एक बार अहमदाबाद के नगर निगम चुनावों में भाग लिया तो पांच सीटें जीत गया। इसके बाद फिर उसने अपने राजनीतिक रसूक का इस्तेमाल करते हुए शराब के धंधे को पूरे गुजरात में फैला दिया।
अब्दुल लतीफ धंधे में रोड़ा बनने वाले लोगों को अपहरण और हत्या तक कर देता। 80 के दशक में गुजरात में लतीफ के नाम की तूती बोलती थी। धीरे- धीरे लतीफ के खिलाफ हत्या और अपरण के मामले इतने ज्यादा हो गए कि पुलिस को वह 40 से ज्यादा हत्या और अपहरण के मामले में वांटेड अपराधी बन गया। 1993 में हुए मुंबई धमाकों में भी लतीफ की भूमिका संदिग्ध मानी गई।
गरीबों का मददगार था गैंगेस्टर लतीफ
लतीफ के धंधों की बात करें तो आने वाली फिल्म रईस में दिखाया गया है कि वह बार भी चलाता था। इतना ही नहीं शराब परोसने के लिए वह महिलाओं का इस्तेमाल करता था यहां तक कि देह व्यापार का धंधा भी चलाता था। लेकिन लतीफ के बेटे ने अदालत में अपने वकील के जरिए जानकारी दी है कि लतीफ के खिलाफ पुलिस में कुल 97 मामले दर्ज हुए थे लेकिन इनमें एक भी मामला देह व्यापार का नहीं है।
मुस्ताख शेख के वकील मुस्ताक गुज्जर ने मीडिया को बताया कि लतीफ के खिलाफ आतंकवाद निरोधी कानून (टाडा) के तहत भी मामले दर्ज हुए लेकिन उसने कभी भी देह व्यापार का धंधा नहीं किया। लतीफ ने गुजरात के पोपटिवाड इलाके में जब शराब का धंधा शुरू किया था तभी उसने अपराध के दुनिया में कदम रखा था।
उसने सुपारी लेकर लोगों को गोली मारने, हवाला कारोबार, जमीन की व्यापार और हथियारों की तस्करी तक की है। इसके अलावा लतीफ के सकारात्मक पक्ष की बात की जाए तो वह गरीब मुस्लिम युवकों की नौकरी लगवाता था और गरीबों की आर्थिक मदद भी करता था।
नरोदा पाटिया एनकाउंटर में मारा गया लतीफ
जानकारी के अनुसार लतीफ पहली बार जेल तब गया जब वह 1995 में दिल्ली में गिरफ्तार हुआ।
मामलों की जांच के लिए 14 दिन की हिरासत के बाद उसे गुजरात की साबरमती जेल में बंद कर दिया। 1997 में लतीफ कथित तौर पर यहां से भागने की कोशिश कर रहा था तो पुलिस ने नरोदा पाटिया इलाके में एक एनकाउंटर में मार गिराया।
कहा जा रहा है कि यह एनकाउंर उस वक्त के गुजरात के मुख्यमंत्री शंकर सिंह वघेला के वक्त हुआ था। लतीफ के बेटों ने 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में वघेला के खिलाफ चुनाव पर उतरे थे।