जिसके बाद अभियोजन पक्ष ने इसी रिकॉर्डिंग को सबूत के तौर पेश किया। साथ ही जेल में बंद राजन के वॉइस सैंपल भी उससे मैच हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक उस वक्त विदेश में बैठे राजन ने हत्या को अंजाम देने के लिए शूटर सतीश कालिया और उसके साथियों की मदद ली थी। जिसमें एक अन्य पत्रकार जिगरा वोरा ने जेडे की पहचान कराने में राजन की मदद की थी।
बता दें कि मामले में पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी जानकारी देते हुए बताया था कि कैसे राजन के आदमी जेडे का पीछा करते थे। साथ ही हत्याकांड से जुड़ी जो सीसीटीवी फुटेज मीडिया ने दिखाई थी जिसमें आरोपी उसका पीछा कर रहे थे और आखिर में जेडे को गोली मारी। वह वही हत्यारे थे जो जेडे का पीछा करते थे।
इसके अलावा सतीश कालिया और संतोष देशपांडे के वकीलों का कहना है कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए हैं। वहीं दो साल पहले यह केस मुंबई पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दिया गया था। इसके अलावा छोटा राजन के वॉइस सैंपल की रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई थी।