अपने नवजात बेटे को खो देने के आसूं मां-बाप की आंखों से टप-टप गिर रहे थे और वे अपने बच्चे के शव को घर लेकर जाना चाहते थे। लेकिन अस्पताल की ओर से किसी तरह की मदद नहीं मिली। मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर के सरकारी अस्पताल कहा है, यहां प्रशासन ने एंबुलेंस का इंतजाम करने से मना कर दिया और उन्हें मृत बच्चे को बैग में ले जाने की सलाह दी।
मां-बाप हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते फिर रहे थे। इसके बावजूद स्वास्थय कर्मियों का दिल नहीं पसीजा। मजबूर मां-बाप अपने बच्चे के शव को करीब 12 घंटे तक बैग में लेकर घूमते रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें एंबुलेंस नहीं दी गई। हालांकि बाद में रेड क्रॉस ने दंपत्ति को एंबुलेंस मुहैया कराई और शव को ले जाने की कही।
दंपत्ति से रिश्तेदार ने बताया कि गरीब होने की वजह से मजबूर मां-बाप एंबुलेंस की मांग कर रहे थे लेकिन नाराज स्टाफ ने कहा कि इसे बैग में ले जाओ और जहां चाहों वहां फेंक दों। डेक्कन क्रोनिकल की खबर के अनुसार पिता का नाम येल्ल्म रमेश है और पति का नाम शशिकला है।