निगोही क्षेत्र के गांव गांगेपुरा में वर्ष 2004 में जमीन के विवाद में हुई गैर इरादतन हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फराह मतलूब ने दोष सिद्ध होने पर चार सगे भाइयों को आजीवन कारावास व 51-51 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है, साथ ही जुर्माने की कुल धनराशि में से एक लाख रुपये मृतका के वारिस को बतौर क्षतिपूर्ति दिलाए जाने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार गांगेपुरा निवासी मेवाराम ने निगोही थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया था कि 22 जनवरी 2004 को शाम साढ़े चार बजे उसके परिवार के हरीशचंद्र अपने सगे भाई फूलचंद्र, बृजपाल, मुनेश्वर के साथ लाठी-डंडा लेकर उसके दरवाजे के सामने आए और गाली-गलौज करने लगे। मां रामवती ने विरोध किया तो वह लोग मां को पीटने लगे। बचाने आई मौसी रामकली व भाई प्रेमपाल को भी पीटा। गांव के लोगों ने बीच बचाव किया।
मेवाराम ने बताया कि वह अपनी मां को बेहोशी की हालत में निगोही अस्पताल लेकर गया। यहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में तीसरे दिन इलाज के दौरान मां की मृत्यु हो गई। घटना में चारो भाइयों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। मुकदमे की विवेचना के उपरांत आरोपी चारों भाइयों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय भेज दिया।
घटना के मूल में जमीन संबंधी विवाद का होना बताया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सरकारी वकील उमेश चंद्र गुर्जर की ओर से पेश किए गए सात गवाहों के बयान सुनने व साक्ष्यों को परखने और बचाव पक्ष के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने दोष सिद्ध होने पर हरीश चंद्र, फूलचंद्र, बृजपाल, मुनेश्वर को आजीवन कारावास व 51-51 हजार रुपये के अर्थ दंड से दंडित किया।
आरोपी कोर्ट में नहीं पेश कर पाए साक्ष्य
आरोपी हरीश चंद्र व उसके भाइयों ने कोर्ट में बयान के बतौर कहा कि मेवाराम के सगे बाबा ने उनके पिता को पांच बीघा जमीन का बैनामा इस मुकदमे की घटना से कई वर्ष पहले कर दिया। इस बात से नाराज होकर मेवाराम के पिता ने अपने पिता का कत्ल कर दिया। इसमें उसके पिता ने मेवाराम के पिता के खिलाफ गवाही दी थी। इससे मेवाराम के पिता को 20 वर्ष की सजा हुई। इस कारण मेवाराम ने उसे व उसके भाइयों को रंजिशन झूठा फंसा दिया, लेकिन आरोपी चारो भाई अपनी सफाई में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाए।