साल 2016 खत्म होने को है और नए साल के जश्न की तैयारियां भी जोरों पर चल रही हैं। ऐसे में नए साल के रंग में भंग डालने के लिए ड्रग्स माफिया ने भी तैयारिया कi थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक
देश के सबसे बड़े शहर मुंबई से इन ड्रग्स माफियाओ की एक बड़ी तैयारी का भंडाफोड़ हुआ है। माफिया काली कमाई के लिए फिल्मी कोड का इस्तेमाल कर रहे थे।
मिड डे की खबर के मुताबिक इनमें बड़ी फिल्में सैरियत, बाजीराव मस्तानी और पिंक के नाम पर इस्तेमाल हुआ था। साथ-साथ देश के बड़े बॉलीवुड सुपरस्टार्स की पत्नियों के नाम पर भी ड्रग्स का नाम रखा गया था। दरअसल, पुलिस की नजरों से बचने के लिए माफिया ने ड्रग्स के नाम ऐसे रखे थे।
फिल्म पिंक के नाम का भी किया इस्तेमाल
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बताया कि इन तस्करों ने क्रिस्मस से नए साल की शाम तक किए जाने वाले जश्न में ड्रग्स पहुंचाने की तैयारी की हुई थी। पुलिस ने बताया कि इन तस्करों की लिस्ट में शहर कोलाबा, संधहस्ट्र रोड और वादी बंदर शामिल थे। वहीं कंदावली पुलिस ने करीब 1 करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी थी। पर पुलिस के दावों के बावजूद तस्करों ने नया तरीका अपनाकर पुलिस को चकमा देने की साजिश रची थी।
नारकोटिक ड्रग को एमडी पुकारा जाता है लेकिन उसका नाम मराठी फिल्म सैरियत रखा गया। सैरियत का असल अर्थ पागलपन होता है और इसीलिए एमडी को सैरत का नाम दिया गया। वहीं रणवीर सिंह की फिल्म बाजीराव मस्तानी के मस्तानी का इस्तेमाल भी किया गया।
पुलिस ने बताया कि नजर में नहीं आए इसलिए लगातार इन नामों में बदलाव कर दिया जाता था। इतना ही नहीं कई ड्रग्स का नाम बॉलीवुड के सितारों की पत्नियों के नाम पर भी रखा गया।
ड्रग की कीमत 15 से 20 हजार प्रति ग्राम
बताया जाता है कि इन ड्रग्स की कीमत 15 हजार से 20 हजार प्रति ग्राम है। आधिकारिक सूत्र ने बताया कि इस तरह के घुमावदार नामों की वजह से जांच करने में खासी परेशानी आई। पुलिस ने बताया कि कोड की वजह से यह पहचान पाना मुश्किल हो रहा था कि आखिर राज्य के किस शहर में कौन सी ड्रग्स सप्लाई की गई है।
आधिकारिक सूत्र ने यह भी बताया कि फिल्म का नाम होने की वजह से तस्कर की पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया था। काले कारोबार की अलग पोल खुलने पर मुंबई पुलिस के प्रवक्त अशोक दुधे ने कहा कि वे शहर के लोगों से अपील करते हैं कि अगर किसी भी तरह की तस्करी को भांप जाते हैं तो तुरंत पुलिस को जानकारी दे।