मोतीपाकड़ गांव में शुक्रवार की सुबह एक महिला और बच्ची के सिर कटे शव मिलने से सनसनी फैल गई। तमाम कोशिश के बाद भी ग्रामीणों और पुलिस को सिर विहीन शवों की शिनाख्त में रात तक कामयाबी नहीं मिल सकी।
करीब 20 मीटर दूर चक रोड पर पड़े खून से दोनों की हत्या इसी इलाके में किए जाने के संकेत मिले, जबकि खून की स्थिति ने यह साफ किया कि डबल मर्डर की वारदात बृहस्पतिवार आधी रात के बाद की है।
करीब 30 वर्षीय महिला के शव से पहला सामना हुआ मोतीपाकड़ निवासी गोरख दीक्षित का। शुक्रवार सुबह वह अपने खेत में गन्ने की फसल की निगरानी को पहुंचे तो उन्हें महिला का सिर विहीन निर्वस्त्र लाश नजर आई। करीब जाकर देखा तो घुटने के कुछ ऊपर से महिला का बायां पैर कटा हुआ था। शव के करीब फिरोजी रंग का कुर्ता पड़ा था लेकिन सलवार आसपास नहीं थी।
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गोरख की सूचना पर पहले गांव के लोग मौके पर जुटे, जबकि कुछ समय बाद रामकोला थाने के एसओ श्रीप्रकाश भी पहुंच गए। पुलिस ने ग्रामीणों के साथ मृतका का सिर तलाशने की कोशिश की तो कुछ दूरी पर करीब चार साल की बच्ची की सिर कटी लाश मिली। बच्ची के शरीर पर भी कपड़े नहीं थे। पास में लाल रंग की फ्रॉक पड़ी थी। बच्ची के शव के पास ही महिला के पैर का कटा हुआ हिस्सा मौजूद था।
तांत्रिक क्रिया का नतीजा तो नहीं?
हालात से साफ हो गया कि दोनों की हत्या काफी नृशंस तरीके से की गई थी। डबल मर्डर की सूचना पर अपर पुलिस अधीक्षक हरिगोविंद, सीओ खड्डा नवीन कुमार, डॉग स्क्वॉड तथा फोरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची लेकिन काफी खोजबीन के बाद भी न दोनों की शिनाख्त हुई और न ही वारदात की वजह। उम्र व मौके की परिस्थिति से शव मां-बेटी के होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
सीओ का कहना है कि करीब 20 मीटर दूर चक रोड पर मिले खून और दोनों शवों से बहे खून की स्थिति से हत्याएं बृहस्पतिवार आधी रात के बाद किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। दुष्कर्म का कोई संकेत सामने नहीं आया है।
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महिला और बच्ची की सिर कटी लाशों की स्थिति से जहां दोनों को बर्बर तरीके से कत्ल करने के संकेत साफ हुए, वहीं हत्या के समय दो सिर व एक पैर काटे जाने से तंत्र क्रिया की शंका भी चर्चा में आई। महिला के निर्वस्त्र धड़ के करीब मिले दो ताबीज और दिवाली का वक्त करीब होने से इस तरह की चर्चाओं को और बल मिला।
बिना सिर मिले नहीं हो सकती कनफर्म शिनाख्त
कानून के जानकारों की मानें तो उम्र, हुलिया, कपड़ों के आधार पर महिला और बच्ची के धड़ों से पहचान की कोशिश भले उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जानने में मददगार बन जाए लेकिन बिना सिर मिले किसी शख्स के मरने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकती। लिहाजा कत्ल के बाद सिर गायब करना वारदात करने वाले की सोची समझी साजिश का हिस्सा रहा होगा।