बेहद दुर्दांत और दुस्साहसिक अंदाज में हत्याएं करने में माहिर हो चले मुनीर को भी जरायम पेशे में आगे बढ़ते हुए कई मर्तबा धोखे तो मिले। वहीं खुद को एक बार 25 लाख की चोरी का भी शिकार होना पड़ा।
दिल्ली से डेढ़ करोड़ की लूट के बाद वह पचास लाख रुपयों का बैग लेकर फरारी काटने अलीगढ़ आया और शरणस्थल पर पहली ही रात में उसके सिर सहारे रखे बैग से 25 लाख चोरी हो गए। सुबह चोरी की भनक पर सबसे पहले उसने वहां से निकलने में भलाई समझी और फिर जब चोरी करने वाले का नाम उजागर हो गया तो उसे गद्दार की संज्ञा देकर मारने भी घूमा।
मगर वह आज तक उसके पल्ले नहीं पड़ा। मुनीर स्वीकाराता है कि अगर चोरी करने वाला दीपू ठाकुर उसे मिल जाता तो गद्दारी करने की सजा उसने जिस तरह अपने दोस्त सद्दाम व गांव के ही तंजील अहमद को दी, उसी तरह दीपू को भी मौत के घाट उतार देता। कई लूट और हत्या में वांटेड रहा मुनीर ने अलीगढ़ पुलिस से पूछताछ में कई खुलासे किए हैं।
मुनीर को दबोचने के लिए सर्विलांस पर थे 800 फोन, AMU से मिले इनपुट
मुनीर
पूछताछ में मुनीर ने स्वीकारा कि जब अलीगढ़ में 32-35 लाख की लूट हुईं तो उसने कौमरी सासनी निवासी दीपू ठाकुर को 15 लाख रुपये रखने के लिए दिया। उन रुपयों को दीपू ने हजम कर लिया और बाद में दीपू ने क्वार्सी इलाके में अपने एक दोस्त की हत्या कर कहानी सुना दी कि उन रुपयों को वही दोस्त एक लड़की के चक्कर में लेकर भाग गया।
मगर जब दीपू ने 25 लाख रुपये चुराए तो उसे पहली कहानी झूठी लगी और जानकारी करने पर हकीकत सामने आ गई। चूंकि दीपू से मुलाकात आशुतोष ने कराई थी। इसलिए आशुतोष से अनुमति लेकर वह दीपू की हत्या के लिए खूब घूमा। मगर वह आज तक अपने ठिकानों पर नहीं मिला।
मुनीर के शूटर अतीउल्ला की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ टीम को अतीउल्ला ने मुनीर के बिजनौर, दिल्ली, एएमयू व शहर से जुड़े तमाम कनेक्शन बता दिए थे। अतीउल्ला से एनआईए, दिल्ली स्पेशल सेल सहित तमाम एजेंसियों ने पूछताछ कर ली थी। उन कनेक्शनों के नंबर आदि भी जुटा लिए थे और करीब 800 नंबर पिछले एक माह से सर्विलांस पर थे।
अलीगढ़ से जुड़े भी करीब 400 नंबर सर्विलांस पर थे। मगर पिछले दो माह में किसी नंबर पर कोई कॉल ट्रैप नहीं हुई। इधर, एसटीएफ की अलीगढ़ टीम ने उसके एएमयू कनेक्शन पर काम शुरू किया तो उन्हें इनपुट मिल गया कि वह नोएडा पहुंचने वाला है। बस इसके बाद मात्र तीन दिन के प्रयास में गिरफ्तारी में सफलता मिल गई।
मुश्किल था पकड़ना, चरस के नशे ने कराई गिरफ्तारी
मुनीर
मुनीर को दिन में या जागते हुए पकड़ना बेहद मुश्किल था। टीम के सदस्य इस बात से वाकिफ थे कि अगर आमना-सामना होगा तो हर कीमत पर दोनों ओर से फायरिंग होगी। रात को खबर लगी थी कि वह दस बजे के करीब आनंद विहार दिल्ली बस स्टैंड से वॉल्वो में सवार होकर अहमदाबाद जाएगा। वहां से मुंबई निकलेगा।
इस इनपुट पर अलीगढ़ टीम ने एसटीएफ के बुलेट प्रूफ जैकेट पहले आधा दर्जन शूटरों को साथ लेकर आनंद विहार घेर लिया। हर वॉल्वो की तलाशी ली। मगर नहीं मिला। अहमदाबाद जाने वाली बसों के रवाना होने पर टीम लौट गई।
इधर, मुनीर छिपने के ठिकाने से निकला भी। मगर रास्ते में कहीं उसने चरस की एक सिगरेट पी ली। इसके बाद नशा होने पर वह दो बजे वापस उसी ठिकाने पर पहुंच गया और सो गया। इसके बाद फिर इनपुट कमरे में सोने का मिला तो टीम अलीगढ़ के चारों सदस्य बिना किसी को बताए मॉर्निंग वॉक स्टाइल में वहां पहुंच गए। पहले कमरे की रैकी हुई और बाद में मुठभेड़ के बाद मुनीर को दबोच लिया। बिना पल गवाएं हथकड़ी डाल दी गईं।
दुर्दांत को दबोचकर 30 मिनट खुशी में झूमी टीम
जिस टॉस्क के पीछे देश की तमाम एजेंसियां पड़ी थीं। बार-बार कहा जा रहा था कि वह हथियारों के जखीरे संग है, निश्चित मुठभेड़ होगी। उस दुर्दांत को जब टीम अलीगढ़ के चार जाबांजों ने दबोच लिया और गाड़ी में डाल लिया तो वह तीस मिनट तक तो खुशी में झूमते रहे।
खुशी का ठिकाना इस कदर था कि वह रास्ता तक भटक गए। जब खबर अधिकारियों तक पहुंची तो फिर बुलेट प्रूफ जैकेट में टीम उनके पास सपोर्ट के लिए पहुंची। मगर तब तक उनके लिए कुछ नहीं बचा था।