दायराशाह अजमल का रहने वाला आफताब नाटे फरार होने के बाद 32 साल तक मौलाना करीम बनकर कभी अजमेर शरीफ तो कभी मुंबई और सूरत की दरगाह और मसजिदों में रहा।
मोटी रकम लेकर करीब 35 महिलाओं के साथ हलाला किया। उसने अपनी पहचान मौलाना करीम के नाम से बनाई, लेकिन कहीं पर भी अपना पहचान पत्र नहीं बनवाया। इन शहरों की दरगाहों में झाड़, फूंक, गंडा ताबीज बांटकर दौलत भी जुटाई।
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दर्जन भर से अधिक शार्गिद बनाए और सैकड़ों मुरीद भी बने। पुलिस की पकड़ से बचने के लिए हर महीने सिम बदल लेता था। परिवार में पत्नी और बच्चों से भी संपर्क रखे हुए हुआ था। एसपी सिटी सिद्धार्थ मीना ने बताया कि अफताब को परिजनों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेने पर ही गिरफ्तार किया जा सका है।
एसपी सिटी ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि आफताब ने फरारी 32 साल में मुंबई, सूरत और अजमेर शरीफ के हर जगह मोहल्ले की पूरी जानकारी थी। अजमेर शरीफ में तो मौलाना करीम के नाम से अच्छी खासी पहचान बना ली थी। इलाहाबाद के दायराशाह अजमल में साल भर के अंदर एक या दो बार आया करता था।