राजस्थान सरकार की ओर से स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में किए गए बदलाव के चलते कांग्रेस आंदोलन की चेतावनी दे रही है, वहीं आरएसएस भी नाराज चल रहा है। नए पाठ्यक्रम में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का नाम हटाने से कांग्रेस सरकार को घेर रही है, वहीं रामप्रसाद बिस्मिल, झांसी की रानी जैसे नाम गायब होने के चलते आरएसएस ने भी शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी से मिलकर नाराजगी जताई।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी शिक्षा मंत्री को तलब कर सफाई मांगी। शिक्षा मंत्री ने भी बयान जारी कर सफाई पेश की है और कहा है कि पाठ्यक्रम का रिव्यू होगा। सरकार शिक्षा का राजनीतिकरण नहीं कर रही है। पाठ्यक्रम बनाने का काम स्वायत्त संस्था करती है। सरकार ने कक्षा सात में भी भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम जोड़ा है। जो पहले नहीं था।
एक-दो नहीं 15 स्थानों पर पंडित नेहरू का उल्लेख है। पंडित नेहरू को पुस्तकों से न तो हटाया है और न ही हटाने की सरकार की कोई मंशा रही है। शिक्षा मंत्री ने कक्षा सात, आठ और नौ की पुस्तकों और उन पेज नम्बरों का उल्लेख किया, जहां नेहरू के नाम का उल्लेख है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पाठ्यक्रम तैयार करने का काम एसआरटी और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड करता है।
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और रामप्रसाद बिस्मिल का नाम यदि सिलेबस में रह गया है, तो सिलेबस का रिव्यु करवाकर उनका नाम भी जुड़वाया जाएगा। देवनानी ने कहा कि वे मुख्यमंत्री को मिलकर वस्तुस्थित बता चुके हैं। कांग्रेस बिना पाठ्यक्रम को पढे झूठे आरोप लगा रही है। मंत्री ने बताया कि महान विभूतियों के दो-तीन पाठ यदि नहीं जोड़े गए हैं, तो उन्हें पुस्तकों में सप्लीमेंट्री रूप में जुड़वा दिया जाएगा।