छत्तीसगढ़ का खरसिया भाजपा के पितृ पुरुष माने जाने वाले स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल का गढ़ हुआ करता था। एक समय में पूरे अविभाजित मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भाजपा की राजनीति यहीं से संचालित हुआ करती थी। यह नगर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकाय मंत्री अमर अग्रवाल का गृह क्षेत्र भी है। बावजूद इसके आजादी के बाद से लेकर अब तक भाजपा यहां कभी जीत हासिल नहीं कर पाई है।
खरसिया सीट आज भी कांग्रेस के पास है। वर्तमान में यहां कांग्रेस के उमेश पटेल विधायक हैं। आगामी चुनाव में भी उनका टिकट तय माना जा रहा है। इससे पहले इस सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नंद कुमार पटेल हमेशा अजेय रहे। वे पांच बार विधायक रहे थे। उनसे पहले कांग्रेस के ही लक्ष्मी प्रसाद पटेल के पास यह सीट रही। वे भी 1977 से 1988 तक विधायक रहे। इस बार इस सीट पर भाजपा आईएएस अधिकारी और रायपुर के कलेक्टर ओपी चौधरी के सहारे कांग्रेस की इस अजेय सीट पर अपनी मुहर लगाना चाहती है।
खरसिया विधानसभा सीट 1977 बनी। पहला चुनाव हुआ, तो कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल विधायक बने। वे 1988 तक लगातार विधायक रहे। उन्होंने अर्जुन सिंह के लिए अपनी सीट से इस्तीफा दिया। यहां उपचुनाव हुआ और कांग्रेस से अर्जुन सिंह के खिलाफ भाजपा के दिलीप सिंह जूदेव उतरे। इसमें अर्जुन सिंह ने जीत हासिल की और कांग्रेस का वर्चस्व खरसिया में कायम रहा। इसके बाद कांग्रेस से नंदकुमार पटेल 1990, 1993, 1998, 2003 और 2008 तक लगातार पांच बार जीत हासिल करके विधायक सीट कब्जे में रखी। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमले में उनकी मौत हो गई।
खरसिया सीट पर कांग्रेस ने नंदकुमार पटेल के पुत्र उमेश पटेल को टिकट दिया। उमेश ने जीत का इतिहास रच दिया। इस सीट में वर्तमान में कांग्रेस के उमेश पटेल ही विधायक हैं।
ओपी चौधरी की ये है ताकत
आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी मूलरूप से खरसिया विधानसभा के ही निवासी हैं। वह भी अघरिया (पटेल) समाज से हैं। उन्होंने खरसिया से सटे जिले जांजगीर में कलेक्टर रहते हुए कई कार्य किए। कई नई-नई योजनाएं लाईं। युवाओं की पढ़ाई के लिए कई काम किए। बिहार के सुपर-30 आनंद को जांजगीर के बच्चों के बीच लाए और टिप्स दिए। वे अघरिया समाज के युवाओं में रोल माडल के रूप में देखे जा रहे हैं। उनका रायपुर कलेक्टर के कार्यकाल का इतिहास भी यादगार है।
भाजपा क्यों चाहती है ये चेहरा
खरसिया विधानसभा सीट में हमेशा ही पटेल समाज से ही विधायक रहा। कांग्रेस से अर्जुन सिंह जरूर अपवाद रहे, पर उनके लिए लक्ष्मी प्रसाद पटेल ने ही अपनी सीट छोड़ी थी और वे ही चुनाव की बागडोर संभाले हुए थे। नंदकुमार पटेल ने पूरी तरह से कब्जा जमा लिया। उन्होंने खरसिया में अजेय किला खड़ा कर दिया। झीरमघाटी की घटना के बाद उन्हें लोगों की ज्यादा संवेदना मिली हुई है और वर्तमान में उनका युवा पुत्र उमेश पटेल विधायक भी है।
ऐसे में इसी क्षेत्र और जाति के साथ, युवा चेहरा भाजपा को चाहिए। उसके साथ ही उसका कद भी विधायक उमेश के बराबर हो। इन सभी मानकों में युवा आईएएस ओपी चौधरी खरे उतर रहे हैं। उनका कलेक्टर के दौरान कामकाज भी तारीफे काबिल रहा है। जातिगत वोट को ओपी चौधरी रिझा ले गए, तो अग्रवाल और साहू समाज बीजेपी के पास पहले से हैं। इस लिहाज से भाजपा इस चेहरे पर ही चुनाव लड़ना चाहती है।
खरसिया एक नजर
* कुल मतादाता- 2 लाख 518
* पुरुष मतदाता- 1 लाख 907
* महिला मतदाता- 99 हजार 587
* थर्ड जेंडर मतदाता- 24
* 85 फीसदी साक्षरता दर
* खरसिया विधानसभा सीट 1977 बनी।
* पहले विधायक कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल बने
* 1988 में उपचुनाव में कांग्रेस के अर्जुन सिंह जीते
* 1900 से 2008 तक स्वर्गीय नंदकुमार पटेल विधायक रहे
* 2013 से उमेश पटेल विधायक हैं