बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय
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उजियारपुर के सांसद नित्यानंद राय को बिहार प्रदेश भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे निवर्तमान अध्यक्ष मंगल पांडेय का स्थान ग्रहण करेंगे। राय का कार्यकाल जनवरी 2018 तक होगा।
मंगल पांडेय के विकल्प रूप में नित्यानंद राय का चुना जाना भाजपा के अंदर एक पीढ़ी ही नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव को भी दिखाता है। सवर्ण की पार्टी कही जाने वाली भाजपा से पिछड़ों को जोड़ना नित्यानंद की सबसे बड़ी चुनौती होगी। वैसे तो नित्यानंद बिहार के तीसरे यादव हैं जो प्रदेश अध्यक्ष बने हैं।
इससे पहले जगदंबी प्रसाद यादव और नंद किशोर यादव प्रदेश भाजपा की कमान संभाल चुके हैं। लेकिन तीनों अध्यक्षों के कार्यकाल में सामाजिक और राजनीतिक बनावट अलग-अलग रही है।
नित्यानंद राय उस दौर में प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, जब प्रदेश भाजपा में सवर्ण नेता हाशिये पर हैं और पिछड़ा जमात भाजपा से बिदका हुआ है। यहीं कारण है कि कुछ राजनीतिक जानकार यह भी कह रहे हैं कि राय को जिम्मेदारी सौंपना विधानसभा चुनाव के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सरसंघचालक मोहन भागवत के आरक्षण पर दिए गए बयान की क्षति-पूर्ति है।
दरअसल पिछले विधानसभा चुनाव में ही केंद्रीय नेतृत्व को अहसास हो गया कि बिहार की राजनीति में पिछड़े वोटों में सेंधमारी के बगैर सत्ता में आना संभव नहीं है। यादव वोटों का झुकाव लालू यादव के साथ है। ऐसी स्थिति में पिछड़े वोटों में सेंधमारी के लिए भाजपा की रणनीति साफ है।