मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश में अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए नेशनल एक्रीडेशन बोर्ड फॉर हास्पिटल एवं हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) मूल्यांकन
के जरिए अस्पतालों को ग्रेड देता है। स्वच्छता से लेकर पर्याप्त स्टाफ मरीजों को मिलने वाले उपचार तक तमाम बिंदुओं पर समीक्षा के बाद अस्पताल को ए ग्रेड मिलता है। वर्ष 2016
में आईआरडीएआई ने एक आदेश देते हुए अस्पतालों को ए ग्रेड हासिल करने के लिए दो वर्ष का वक्त दिया था। साथ ही कहा था कि अगर यह ग्रेड नहीं होता तो उन अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा नहीं होगी, लेकिन इसका आयुष्मान भारत से कोई लेना-देना नहीं है।
आयुष्मान भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि दो वर्ष में देश के करीब 700 अस्पताल ही ग्रेड ले पाए हैं। जबकि इससे पहले 600 के करीब अस्पताल यह ग्रेड प्राप्त कर चुके हैं, जबकि देश में अस्पतालों की संख्या 12 हजार से ज्यादा है। अस्पतालों में एनएबीएच सर्टिफिकेट को लेकर दिलचस्पी बढ़ाने के लिए पीएम मोदी सरकार ने कायाकल्प योजना
शुरू की थी। इसमें एम्स पिछले दो वर्ष से पहले स्थान पर आकर एक करोड़ रुपये बतौर पुरस्कार के रूप में ले रहा है।
नियमों में होगा बदलाव
आयुष्मान भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आईआरडीएआई को पत्र लिख नियमों में बदलाव की अपील की है। शुक्रवार को प्राधिकरण की ओर से मंत्रालय को बदलाव
पर सहमति पत्र भी मिल चुका है। आयुष्मान भारत पहले से ही इस नियम से अलग है। बावजूद इसके नए नियमों के आने के बाद कैशलेस उपचार को लेकर सवाल खड़े नहीं होंगे।