लोक सेवा आयोग में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई भर्तियों की जांच सीबीआई से कराने पर हाईकोर्ट भी सहमत है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह जांच में सीबीआई का सहयोग करे। मगर शर्त रखी है कि सीबीआई मौजूदा अध्यक्ष और सदस्यों को बुलाकर पूछताछ नहीं करेगी। पूर्व अध्यक्ष और सदस्यों के मामले में यह शर्त लागू नहीं होगी। इससे पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव की दिक्कतें बढ़ सकती हैं, क्योंकि जांच उन्हीं के कार्यकाल में हुई भर्तियों की होनी है।
बृहस्पतिवार को मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ के समक्ष आयोग अध्यक्ष अनिरुद्ध यादव की याचिका पर सुनवाई हुई। उन्होंने याचिका में सीबीआई जांच रोक ने की मांग की है। कोर्ट ने इस पर सीबीआई और प्रदेश सरकार से जवाब मांगा था। दोनों पक्षों ने अपना-अपना हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने आयोग के अध्यक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए छह फरवरी तक की मोहलत दी है।
प्रदेश सरकार ने अपने जवाब में सीबीआई जांच कराने के कारण बताएं हैं, जबकि सीबीआई का कहना था कि वह संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप होने पर जांच कर सकती है। सीबीआई का कहना है कि वह फिलहाल मामले की प्रारंभिक जांच कर रही है। इसमें जैसे तथ्य मिलेंगे उसके मुताबिक आगे की विवेचना की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सीबीआई केस दर्ज कर कार्रवाई कर सकती है।
केंद्र सरकार का कहना था कि उसे आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाने के अलावा अन्य कार्रवाई करने का अधिकार है। केंद्र का कहना था कि राज्य ने भर्तियों में बड़े पैमाने में अनियमितता की शिकायत करते हुए सीबीआई जांच की संस्तुति भेजी थी, जिस पर उसने जांच का आदेश दिया। कोर्ट ने आयोग के अध्यक्ष को सीबीआई, केंद्र और राज्य सरकार के हलफनामे का जवाब दाखिल करने के लिए निर्देश दिया है।