भारतीय लोग मुंह की स्वच्छता को लेकर अनजान रहते ह्रैं। खराब दांत के कारण हृदय रोग सहित कई बीमारियां पनप रहीं हैं। दंत चिकित्सकों को इस विषय में सोचना चाहिए।
शनिवार देर शाम शहर के एक होटल में इंडियन डेंटल एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में ये बात मुख्य अतिथि लखनऊ केजीएमयू इंडोडांटिक्स हेड आफ डिपार्टमेंट प्रो. अनिल चंद्रा ने दंत चिकित्सकों से कही। उन्होंने कहा कि दांतों की खराबी से 60 से 65 प्रतिशत और पेरियोडेंटल बीमारियों से 50 से 90 प्रतिशत जनसंख्या प्रभावित है। आजकल जंक फूड की खपत अधिक होने से स्कूली बच्चों में यह समस्या काफी अधिक है। दांतों का खराब होना कैरीज इनमेल पर एसिड की क्रिया के कारण होता है। एसिड तबपैदा होता है जब दांत की सतह पर प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया के साथ खाद्य पदार्थ या पेय में मौजूद शुगर प्रतिक्रिया करती है। उन्होंने कहा कि दांतों का दर्द अब दिल का दर्द बनता जा रहा है। कई ऐसे लक्षण सामने आने लगे हैं कि दांतों की खराबी शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित करने लगी है। दिल के रोग भी सामने आने लगे हैं। उन्होंने रोटरी आरसीटी के बारे में भी जानकारी दी। कहा कि चिकित्सक अभी तक दांतों की खराबी को दूर करने के लिए आरसीटी जो हाथों से करते थे उसके लिए भी रोटरी आरसीटी की एक मशीन आ गई है। चिकित्सकों को भी अब तकनीक इस्तेमाल करनी चाहिए। इस मौके पर अध्यक्ष डॉ. रवींद्र सिंह, सचिव डॉ. अनुराग सिंह, अनिल चंद्रा, डॉ. एके सिंह आदि मौजूद रहे।