शहीदों के परिवारों को पेंशन के अलावा आज तक कोई सहायता नहीं मिली है। कारगिल युद्ध में शहीद सैनिकों के पारिवारिक सदस्यों का कहना है कि हमने अपने बच्चों को बड़ी मुश्किलों से पाला व पढ़ाया लिखाया है। अब बच्चों को सरकारी वादे के अनुसार नौकरी नहीं दी जा रही, जो सरकार का शहीदों के परिवारों के साथ धोखा है। जम्मू कश्मीर के उडी सेक्टर में साल 1998 में शहीद हुए लेफ्टिनेंट जोगा सिंह के बेटे गुलशन सिंह और पत्नी जोगिन्द्र कौर ने आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि 1999 से पहले शहीद हुए सैनिकों के साथ वार टाइम व पीस टाइम के नाम पर भेदभाव किया जा रहा है। पंजाब सरकार ने जो योजना बनाई थी, उसमें अशोक चक्र विजेता का जिक्र तक नहीं किया गया था।
कारगिल युद्ध के दौरान सीमाओं पर देश की सुरक्षा करते हुए शहीद होने वाले सैनिकों के परिवारों को सेना व केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय सहायता के अलावा कई तरह की अन्य सुविधाएं भी दी जा रही है। लेकिन साल 1999 से पहले शहीद हुए शौर्य चक्र व कीर्तीचक्र विजेताओं के परिवार आज भी सरकारी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।