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शिवसेना नेता संजय राउत की राज्यपाल पर तीखी टिप्पणी, कहा- षडयंत्र का केंद्र न बने राजभवन

Mon, 20 Apr 2020 01:39 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

  • 80 के दशक के राज्यपाल रामलाल के बहाने तंज कसा
  • आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे रामलाल, जिन्हें बाद में तत्कालीन राष्ट्रपति ने किया था बर्खास्त
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शिवसेना सांसद संजय राउत - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत करने में हो रही देरी और मीडिया में जारी तर्क-वितर्क पर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इस मुद्दे पर रविवार को अपनी खीझ निकाली।

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उन्होंने राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजभवन को षडयंत्र का केंद्र नहीं बनना चाहिए।

राज्य मंत्रिमंडल ने उद्धव ठाकरे को विधान परिषद सदस्य मनोनीत करने का प्रस्ताव किया है और इस संबंध में सिफारिश पत्र बीते 6 अप्रैल को ही राजभवन भेजा जा चुका है। लेकिन राज्यपाल अभी तक कानूनी मशविरा कर रहे हैं।

वहीं, विपक्षी दल भाजपा का साफ कहना है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत राज्यपाल उद्धव ठाकरे को एमएलसी नहीं मनोनीत कर सकते। इसी चर्चा के मद्देनजर संजय राउत का ट्वीट आया है। उन्होंने ट्वीट कर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी का नाम लिए बिना कहा कि "राजभवन राजनीतिक साजिश का केंद्र नहीं बनना चाहिए। याद रखिए, इतिहास उन लोगों को नहीं छोड़ता जो असंवैधानिक व्यवहार करते हैं।" वहीं, एक अन्य ट्वीट में राउत ने 80 के दशक में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल रहे रामलाल को आज के हालात से जोड़ते हुए बेशर्म के तौर पर संबोधित किया है।

कौन थे राज्यपाल रामलाल

दरअसल, संजय राउत ने अपने ट्वीट में उस राज्यपाल रामलाल का जिक्र किया है जो 15 अगस्त 1983 से 29 अगस्त 1984 तक आंध्र प्रदेश के राज्यपाल थे। रामलाल उस वक्त विवादों में आए थे जब उन्होंने अमेरिका इलाज कराने गए उस समय के मुख्यमंत्री एनटी रामराव की जगह राज्य के वित्तमंत्री एन. भास्कर राव को राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया था।

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उस वक्त भास्करराव के पास करीब 20 फीसदी विधायकों का समर्थन था, जबकि एनटी रामाराव एक हफ्ते के बाद विदेश से लौट आए थे। फिर लंबा राजनीतिक ड्रामा चला था। इसका समापन एक महीने बाद हुआ, जब राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने रामलाल को राज्यपाल के पद से बर्खास्त कर दिया और इसके तीन दिन बाद एनटी रामाराव फिर से मुख्यमंत्री बने थे।  
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