कोरोना कैपिटल बनी मुंबई में कुछ लोग कोरोना संक्रमित हुए और अनजाने में ही कोरोना से जंग जीत ली। लेकिन उन्हें इसका पता भी नहीं चला। इससे उनके शरीर में एंटीबॉडी तैयार हो गई है। निजी थायरोकेयर लैब ने यह खुलासा किया है।
मुंबई में कुल 14 लैब में कोरोना की जांच हो रही है। इनमें कई निजी लैब भी शामिल हैं। थायरोकेयर के अलावा अन्य लैब की जांच में भी कुछ इसी तरह की रिपोर्ट आने का अंदेशा जताया गया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में कोरोना संक्रमण बढ़ा।
सघन झुग्गी बस्तियों में रहने वाले जिन लोगों का कोरोना टेस्ट हुआ उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया और उनका उपचार हुआ। लेकिन कुछ लोगों में लक्षण नहीं दिखे तो जांच भी नहीं हुई। झुग्गी बस्तियों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो सका।
संभव है कि ऐसे ही लोग संक्रमित हुए। लेकिन इम्युनिटी पॉवर मजबूत होने के कारण वे सभी स्वस्थ हो गए जिससे उनके शरीर में एंटीबॉडी तैयार हुई है। जिनके कोरोना संक्रमित होने की संभावना कम है।
एक लाख लोगों की हो जांच- शेलार
भाजपा नेता व विधायक आशिष शेलार ने इस संबंध में बीएमसी आयुक्त आईएस चहल को पत्र लिखा है। साथ ही, ट्वीट भी किया है कि एक प्राइवेट लैब में एंटीबॉडी टेस्ट कराने आए वरली के लोगों में 32.15 फीसदी, घाटकोपर में 36.7 फीसदी, सांताक्रुज में 31.45 फीसदी और बांद्रा पश्चिम में 17 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी पहले से ही तैयार हो चुकी है।
इससे पता चलता है कि लोग कोरोना संक्रमित होकर भी ठीक हुए हैं और इन्हें पता भी नहीं चला। इसलिए इसे आधार मानते हुए मुंबई में 1 लाख लोगों की जांच कराई जाए ताकि सचाई सामने आ सके।