महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को राज्यपाल द्वारा विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। सोमवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर समानांतर सत्ता संचालन के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि संभवतया उद्धव को एमएलसी मनोनीत करने का दबाव बनाने के लिए उनपर यह आरोप लगाया गया।
फडणवीस ने कहा कि राज्यपाल प्रदेश का मुखिया होता है। इस हैसियत से उन्हें अधिकारियों के साथ बैठक का अधिकार है।
कोरोना वायरस के संकट की घड़ी में राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने न सिर्फ महाराष्ट्र के अधिकारियों से बात की बल्कि अन्य राज्य के राज्यपालों से भी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में कहा कि उन्हें भी अधिकारियों से चर्चा कर राज्य की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
फडणवीस ने कहा कि राज्यपाल की अधिकारियों से बातचीत में कुछ भी गलत नहीं है।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह राज्यपाल तय करेंगे कि उद्धव को एमएलसी मनोनीत करना है या नहीं। इस मामले में राज्यपाल कानूनविदों से राय लेकर अपने विवेक से निर्णय लेंगे। लेकिन यदि उद्धव एमएलसी बनते हैं तो उन्हें मेरी शुभकामना है।
बता दें कि आगामी 27 मई को उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बने 6 महीने हो जाएंगे। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उद्धव को 28 मई से पहले विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है। अन्यथा उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर फिर से शपथ ग्रहण करना होगा।
समझा जा रहा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आसानी से विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मनोनीत कर लिए जाएंगे। लेकिन उतना आसान नहीं लगता। फडणवीस ने कहा कि इससे पहले राज्य सरकार ने एनसीपी के दो नेताओं को एमएलसी मनोनीत करने का प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा था।
लेकिन उन्होंने यह कहते हुए प्रस्ताव लौटा दिया था कि दोनो सदस्यों के रिक्त पद का कार्यकाल समाप्त होने की अवधि एक साल से कम है। इसलिए नियुक्ति नहीं की जा सकती। यह कहकर फडणवीस ने उद्धव की राह में अड़चन का भी संकेत दिया है।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि भाजपा का काम गुमराह करना है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने में राज्यपाल को कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए।
चूंकि विधान परिषद सदस्य के दोनों पद का कार्यकाल 6 जून 2020 तक है, तो इतने समय तक उद्धव ठाकरे एमएलसी हो सकते हैं। उसके बाद दूसरे विकल्प पर विचार किया जाएगा। सावंत ने आरोप लगाया कि भाजपा नियमों का हवाला देकर बेवजह मामले में टांग अड़ा रही है, जबकि उद्धव के एमएलसी बनने में कोई दिक्कत नहीं है।