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कोरोना वायरसः महाराष्ट्र में सरकारी दफ्तर बंद नहीं होंगे, सीएम ठाकरे बोले- लोग नहीं माने तो सोचेंगे

Tue, 17 Mar 2020 04:45 PM IST
Harendra Chaudhary अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

  • कॉरपोरेट सेक्टर ने कर्मचारियों को दिये वर्क फ्रॉम होम का निर्देश
  • डॉक्टरों के अनुसार कोरोना वायरस से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए भीड़ का कम होना जरूरी
  • बंद हो सकती हैं बेस्ट बसें, हो सकती है सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में एक सप्ताह की छुट्टी
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Mumbai Local - फोटो : Social Media
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विस्तार
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महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के संकट से निपटने के लिए सभी सरकारी कार्यालय 7 दिन के लिए बंद किए जाने की खबरों को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि हाल फिलहाल हम ऐसा कुछ नहीं करने जा रहे हैं। मंगलवार को राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कई निर्णय लिए गए। 

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बैठक के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि सार्वजनिक परिवहन पहले की तरह चालू रहेगा और सरकारी दफ्तर भी बंद नहीं होंगे। हम 50 फीसदी क्षमता के साथ सरकारी कार्यालयों को काम करने की इजाजत देने पर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ट्रेनों और बसों जैसी जरूरी सेवाओं को हम फिलहाल रोकने नहीं जा रहे हैं। लेकिन लोगों ने सरकार की सलाह नहीं मानी और बेवजह सफर या गैर जरूरी यात्रा जारी रखी तो इन्हें बंद करने पर विचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले 15 से 20 दिन हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण हैं।

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इससे पहले ऐसी खबरें आई थीं कि महाराष्ट्र सरकार ने अगले सात दिन तक सरकारी दफ्तर बंद रखने का फैसला किया है। वहीं कारपोरेट सेक्टर ने सुबह ही अपने दफ्तर शत-प्रतिशत बंद रखने के साथ कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का निर्देश दिया है। 

कारपोरेट सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इस बारे में सरकार को भी सूचित किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने बताया कि कॉरपोरेट सेक्टर ने कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा है। साथ, ही कोरोना के प्रति जागरुकता के लिए अपने कर्तव्य का भी निर्वाह कर रहे हैं।

 

डॉक्टरों के अनुसार कोरोना वायरस से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए भीड़ का कम होना जरूरी है। इसलिए मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन और परिवहन का दूसरा सबसे बड़ा साधन बेस्ट उपक्रम की लाल बसों का परिचालन भी बंद किया जा सकता हैं।

क्या होता है लॉक डाउन

देश में महाराष्ट्र ऐसा राज्य है, जहां सबसे ज्यादा कोरोना वायरस से संक्रमित लोग पाए गए हैं। इसके मद्देनजर राज्य में स्कूल-कॉलेज, जिम, स्विमिंग पूल, थिएटर, मॉल्स आदि पहले ही 31 मार्च तक बंद किए गए हैं। परीक्षाएं भी टाल दी गई है।

अब लॉक डाउन होने से केवल आपदा की स्थिति में ही लोग घर से बाहर निकल सकेंगे। लॉक डाउन में अनाज, औषधि, अस्पताल, बैंक व छोटे बच्चे व बुजुर्ग की देखभाल के लिए ही घर से बाहर निकला जा सकता है।

सभी निकाय चुनाव स्थगित

कोरोना वायरस के मद्देनजर महाराष्ट्र के सभी निकाय चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं। राज्य चुनाव आयोग ने कोरोना संकट को देखते हुए राज्य सरकार की सिफारिश पर यह फैसला किया है। इससे नवी मुंबई और औरंगाबाद महानगरपालिका चुनाव भी स्थगित हो गया है।

राज्य चुनाव आयुक्त यू.पी.एस.मदान ने मंगलवार को यह घोषणा की। राज्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि राज्य में कोविड-19 के प्रादुर्भाव को रोकने के लिए राज्य सरकार ने निकाय चुनाव टालने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि राज्य चुनाव आयोग को 10 अगस्त 2005 के बांबे हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार प्राकृतिक आपदा व आकस्मिक परिस्थिति में चुनाव टालने का अधिकार है।

इसके तहत राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव से संबंधित सभी कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय किया है। उन्होंने बताया कि राज्य के 19 जिलों में 1 हजार 570 ग्राम पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। यहां 31 मार्च को मतदान होना था।

इसी के साथ औरंगाबाद और नवी मुंबई महानगरपालिका सहित नासिक, धुले, परभणी, व ठाणे महानगरपालिका में एक-एक सीट के लिए उपचुनाव कराने की तैयारी की गई थी।

इसके अलावा वसई-विरार महानगरपालिका, अंबरनाथ-कुलगांव, वाड़ी, राजगुरूनगर, भड़गांव, वरणगांव, केज, भोकर और मोवाड़ नगर परिषद-नगरपंचायत, भंडारा-गोंदिया जिला परिषद और उसके अंतर्गत 15 पंचायत समितियों समेत करीब 12 हजार ग्राम पंचायतों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब निकाय चुनाव के लिए पुनः आदेश जारी किए जाएंगे।

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