मुंबई में अनलॉक-1 का आगाज हो चुका है। लेकिन महानगर में कोरोना के कहर का अंत होता नहीं दिख रहा है। शुक्रवार को सूबे में 2436 नए कोरोना संक्रमित मिले। वहीं, 1149 मरीज मुंबई में बढ़े हैं।
आंकड़ों के अनुसार देश में 20 फीसदी कोरोना मरीज अकेले मुंबई में हैं। लेकिन मरीजों की संख्या के अनुरुप समुचित उपचार की ही व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
वहीं, प्राईवेट अस्पतालों ने और भी सिरदर्द बढ़ा दिया है। राज्य सरकार के आदेश के बावजूद प्राइवेट अस्पतालों ने 80 फीसदी बेड मुहैया नहीं कराया है। इसके चलते कोविड-19 के एक्टिव केस चिंता बढ़ा रहे हैं।
मुंबई मे कोरोना संक्रमण में बेतहाशा वृद्धि और मरीजों के दम तोड़ने का सिलसिला लगातार जारी रहने के चलते राज्य सरकार ने 21 मई को सभी प्राइवेट अस्पतालों के 80 फीसदी बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित करने का आदेश जारी किया था।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में भाजपा दल के नेता पार्षद विनोद मिश्र ने आरोप लगाया है कि कोरोना संक्रमित मरीज बेड, वेंटिलेटर के अभाव में दम तोड़ रहे हैं।
शुक्रवार को बीएमसी मुख्यालय में भाजपा के पार्षदों ने मूक धरना दिया। मिश्र ने कहा कि 74 ट्रस्टी अस्पतालों में ही काफी बेड हैं।
इसके अलावा महानगर के प्राइवेट अस्पतालों को मिलाकर 16000 बेड कोरोना संक्रमितों के लिए उपलब्ध हो सकता है।
लेकिन सत्ताधारी दल के नेताओं की मिलीभगत से प्राइवेट अस्पतालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
कोरोना संकट से जूझ रही देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 72 दिन के शुक्रवार को गुलजार हुई। राज्य सरकार की नियमावली के अनुसार आर्थिक गतिविधियां शुरू हो गई।
कंटेनमेंट जोन छोड़कर लगभग पूरी मुंबई में ऑड-ईवन फार्मूले के तहत दुकानें खुलीं।
पहले दिन दुकान खुलने पर इलेक्ट्रॉनिक दुकानों, जूते-चप्पल की दुकानों, बरसात से बचने के लिए तालपत्री और अन्य आवश्यक सामानों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई।