विश्वव्यापी कोरोना संक्रमण महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कहर बरपा रहा है। महाराष्ट्र औद्योगिक प्रदेश के रूप में जाना जाता है। किन्तु, कोरोना वायरस से राज्य की औद्योगिक पहचान भी खतरे में पड़ गई है।
भारत मर्चेंट चेंबर के चेयरमैन प्रकाश केडिया ने कहा कि कोराना संकट के कारण कपड़ा उद्योग एक साल तक नहीं संभल पाएगा। महाराष्ट्र के बोइसर, भिवंडी और इचलकरंजी के टेक्सटाइल्स इंडस्ट्री में लगभाग 50 लाख लोग काम करते हैं।
इसमें से करीब 20 लाख श्रमिक यूपी और बिहार के हैं। श्रमिकों के पलायन और बाजार की मंदी के कारण कपड़ा उद्योग भारी संकट में है।
बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आनंद गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री काफी तकलीफ में है। राज्य में करीब 30 लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं।
इनके पलायन से दिक्कतें बढ़ी हैं। महाराष्ट्र में इन दोनों सेक्टर में 5 करोड़ लोग काम करते हैं, जिसमें से अब तक 65 फीसदी प्रवासी श्रमिक गांव जा चुके हैं सिर्फ 35 फीसदी श्रमिक बचे हैं।
चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईएमसी) के अध्यक्ष आशीष वैद्य कहते हैं कि एमएसएमई सेक्टर के लिए 3 लाख करोड़ की घोषणा काबिले तारीफ है।
देश में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र के कुल 6 करोड़ और महाराष्ट्र में 50 लाख यूनिट्स हैं। यहां कुल 11 करोड़ लोग काम करते हैं। कोई बिना काम के नहीं रह सकता। हमें उम्मीद है कि श्रमिक पुनः लौटेंगे।