नववर्ष की पूर्व संध्या पर मुंबई की चमक-धमक और फिल्मी दुनिया को छोड़कर मिस इंडिया 2024 निकिता पोरवाल ने उज्जैन के सेवाधाम आश्रम, अंकितग्राम में मानव सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। अपने पिता अशोक पोरवाल के साथ पहुंची निकिता ने 4 घंटे तक आश्रम का अवलोकन किया और वहां निवासरत 1100 से अधिक दिव्यांग, बुजुर्ग और बहु-दिव्यांगजनों से आत्मीय मुलाकात की। आश्रम संस्थापक सुधीर भाई के साथ उन्होंने गौ सेवा की और बच्चों के साथ समय बिताया।
निकिता ने आश्रम के 80 वर्षीय बुजुर्गों से लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गीत सुने और अपनी शॉल भेंट कर उनका सम्मान किया। दृष्टिबाधित भोली अग्रवाल के भजन सुनकर उन्होंने दिव्यांगजनों के बीच अपनापन महसूस किया। इस दौरान आश्रम के बच्चों ने लेझिम-पाउली और लाठी-काठी का प्रदर्शन कर उनका स्वागत किया।
निकिता ने कहा, "सपनों की नगरी ने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन मेरी इच्छा थी कि नववर्ष अपनी उज्जैन नगरी में बिताऊं। बाबा महाकाल के दर्शन और सेवाधाम आश्रम के दिव्यजनों से मिलकर मुझे एहसास हुआ कि सच्ची खुशी हमारे भीतर होती है।" उन्होंने दिव्यांगजनों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे किसी भी ताज से ऊपर हैं और सच्चे विश्वसुंदर हैं।
निकिता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, "मैंने सीखा कि खुशी बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर होती है। आज आपने मुझे सिखाया कि शिक्षा से नहीं, बल्कि संस्कार से इंसान बड़ा होता है। आश्रम परिवार अब मेरा भी परिवार है, और मैं जीवनभर इससे जुड़ी रहूंगी।"
इस अवसर पर आश्रम के बच्चों ने निकिता का मालवी पगड़ी और दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। उन्हें विशेष बच्चों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प भेंट की गई। आश्रम संस्थापक सुधीर भाई ने बताया कि निकिता ने मिस इंडिया 2024 का खिताब जीतकर उज्जैन का नाम रोशन किया और अपने इस कदम से मानवीय संवेदनाओं का आदर्श प्रस्तुत किया।
मुम्बई की चकाचौंध एवं सितारों की नगरी को छोड़कर फेमिना मिस इंडिया निकिता पोरवाल नववर्ष पर पहुँची
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