कान्ह डक्ट योजना का निरीक्षण करते हुए
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उज्जैन के शिप्रा में मिल रहे कान्ह नदी के गंदे पानी की रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा बनाई गई कान्ह योजना के तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए मंगलवार को स्थानीय अखाड़ा परिषद के सभी साधु-संत जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ कार्य योजना स्थल जमालपुर पहुंचे। यहां चल रहे कार्य प्रोजेक्ट के बारे में अधिकारियों से हर एक बिंदु पर तकनीकी रूप से जानकारी ली।
वहीं, जल संसाधन विभाग के अधीक्षण यंत्री खरत द्वारा पूरी योजना की जानकारी विस्तार से देने के साथ ही हर नौ मीटर की दूरी पर बनाए जा रहे बड़े कुएं जिनके माध्यम से साफ-सफाई होगी, की जानकारी स्थानीय साधु संतों को दी गई। स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रामेश्वर दास ने उनसे प्रति उत्तर में पूछा कि उन्होंने शासन को जो मांग की थी, उस अनुसार मौके पर कार्य हो।इस पर अधिकारियों ने सभी साधु संतों को आश्वस्त किया कि वर्ष 2027 तक उक्त परियोजना पूरी हो जाएगी एवं उसके बाद हैदराबाद की जिस कंपनी को यह कार्य दिया गया है, वह आने वाले 15 साल तक इसका संधारण भी करेगी।
निरीक्षण के दौरान जूना अखाड़ा नीलगंगा के महंत देवगिरी महाराज,आव्हान अखाड़े के महंत सेवानंद गिरी महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के महंत मुकुंदपुरी महाराज, निर्मोही अखाड़े के महंत भगवान दास महाराज, कासीदास महाराज राजीव लोचन दास महाराज, लालदास महाराज, दिग्विजयदास महाराज, महंत विद्या भारती महाराज स्थानीय आखडा परिषद के प्रबंधक गोविन्द सोलंकी सहित सभी 13 अखाड़े के प्रमुख साधु संत एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।