उज्जैन नगर निगम के एक भवन अधिकारी बिना विभागीय स्वीकृति विदेश यात्रा पर जाने और थाईलैंड में मगरमच्छ का मांस खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की जद में आ गए हैं। नगर निगम प्रशासन ने बिना पूर्व अनुमति विदेश यात्रा पर जाने को बेहद गंभीरता से लिया है। आरोपी अधिकारी के खिलाफ सेवा नियमों के उल्लंघन के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की पूरी तैयारी की जा रही है।
सोशल मीडिया पर तेजी से साझा हो रहे इस वीडियो में नगर निगम में कार्यरत भवन अधिकारी राजकुमार राठौर अपनी पत्नी के साथ एक रेस्तरां अथवा खाद्य स्टॉल पर बैठे नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो क्लिप में अधिकारी अपनी पत्नी के साथ मगरमच्छ का मांस खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो पर अंग्रेजी भाषा में एक संदेश भी लिखा हुआ है, जिसका अर्थ है कि थाईलैंड में पहली बार मगरमच्छ का मांस आजमाते हुए। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक मंचों पर सामने आया, वैसे ही अधिकारी की इस विदेश यात्रा और उनके आचरण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गईं।
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बिना विभागीय अनुमति विदेश यात्रा
नगर निगम प्रशासन के अनुसार शासकीय सेवा में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए किसी भी विदेशी दौरे पर जाने से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से लिखित स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य होता है। हालांकि भवन अधिकारी ने विदेश जाने के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया। वीडियो सार्वजनिक होने के बाद जब मामले की प्राथमिक जांच की गई, तो पता चला कि अधिकारी ने केवल अवकाश स्वीकृत कराया था, लेकिन अपने आवेदन में कहीं भी देश से बाहर जाने की जानकारी प्रस्तुत नहीं की थी।
निगम का कड़ा रुख
प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन सामने आने के पश्चात उज्जैन नगर निगम के अधिकारियों ने इस पर कड़ा रुख अपनाया है। शासकीय नियमावली के अंतर्गत बिना अनुमति के विदेश प्रवास करना गंभीर लापरवाही तथा आचरण नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसी आधार पर अब अधिकारी के विरुद्ध विभागीय स्तर पर औपचारिक जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आरंभ की जा रही है।
चार दिन के अवकाश का मामला
निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा ने पुष्टि की है कि भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने 19 से 23 अक्तूबर के मध्य चार दिन के अवकाश के लिए आवेदन जमा किया था। इस स्वीकृत अवकाश अवधि के दौरान ही वह अपनी पत्नी के साथ थाईलैंड यात्रा पर चले गए थे। हालांकि, उन्होंने अपने छुट्टी के प्रार्थना पत्र में विदेश भ्रमण का कोई भी उल्लेख नहीं किया था और न ही इसके लिए आवश्यक अनापत्ति या अनुमति मांगी थी। बिना किसी पूर्व सूचना अथवा स्वीकृति के आधिकारिक तौर पर विदेश यात्रा पर जाना प्रशासनिक अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। नगर निगम का मानना है कि शासकीय पद पर जिम्मेदार स्थान पर रहते हुए नियमों की अनदेखी करना स्वीकार्य नहीं है।
अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कदम उठाए जाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने बताया कि शासकीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर सबसे पहले अधिकारी को कारण बताओ नोटिस निर्गत किया जाएगा। इसके उपरांत नियमानुसार विभागीय जांच की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन का दोष सिद्ध होता है, तो अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। संभावित अनुशासनात्मक विकल्पों में वेतनवृद्धि रोकने, पदोन्नति प्रभावित करने अथवा अन्य विभागीय दंड देने का प्रावधान शामिल है।