सीहोर जिले में लगातार हो रही बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अमरगढ़, दिगंबर और कालियादेव वॉटरफॉल समेत सभी संवेदनशील जल पर्यटन स्थलों पर 31 अगस्त तक प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। शनिवार को दिगंबर वॉटरफॉल घूमने पहुंचे भोपाल के 15 से अधिक पर्यटकों को प्रशासन ने समझाइश देकर सुरक्षित वापस लौटा दिया।
31 अगस्त तक वॉटरफॉल पर प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित
कलेक्टर बालागुरु के. के. के निर्देश पर जिले के सभी जोखिमपूर्ण जल पर्यटन स्थलों पर 31 अगस्त तक आम लोगों और पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। लगातार बारिश के कारण वॉटरफॉल, डैम और नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जगह तेज बहाव और फिसलन की स्थिति बनी हुई है, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला केवल लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
भोपाल से पहुंचे पर्यटकों को लौटाया गया
शनिवार को भोपाल से 15 से अधिक पर्यटक दिगंबर वॉटरफॉल घूमने पहुंचे थे। मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें रोककर प्रतिबंध की जानकारी दी। नायब तहसीलदार रामलोचन तिवारी ने पर्यटकों को बताया कि लगातार बारिश के कारण वॉटरफॉल क्षेत्र बेहद खतरनाक हो चुका है। समझाइश के बाद सभी पर्यटक बिना किसी विवाद के वापस लौट गए।
बीएनएस की धारा 163 के तहत जारी हुआ आदेश
जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंध लागू किया है। प्रशासन का कहना है कि बारिश के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने, तेज बहाव और फिसलन जैसी परिस्थितियों में छोटी सी लापरवाही भी बड़ा हादसा बन सकती है। इसी वजह से संवेदनशील पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही रोक दी गई है।
राजस्व, वन और पुलिस विभाग कर रहे निगरानी
प्रतिबंध का पालन सुनिश्चित कराने के लिए राजस्व, वन, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। प्रमुख वॉटरफॉल, डैम और जल पर्यटन स्थलों पर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी भी व्यक्ति को प्रवेश न करने दिया जाए और जरूरत पड़ने पर मौके पर ही समझाइश देकर वापस भेजा जाए।
हर साल बारिश में बढ़ती है भीड़, हो चुके हैं कई हादसे
मानसून के दौरान सीहोर के वॉटरफॉल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। भोपाल, विदिशा, रायसेन और आसपास के जिलों से लोग यहां घूमने पहुंचते हैं। लेकिन बारिश के मौसम में यही स्थान सबसे ज्यादा खतरनाक साबित होते हैं। अचानक जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण पिछले तीन वर्षों में इन प्राकृतिक झरनों पर करीब 20 लोगों की जान जा चुकी है। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए इस बार प्रशासन पहले से ज्यादा सतर्क है।
प्रशासन की अपील- रोमांच नहीं, सुरक्षा को दें प्राथमिकता
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे रोमांच के लिए अपनी जान जोखिम में न डालें। प्रतिबंधात्मक आदेशों का पालन करें और वर्षाकाल में जोखिम वाले पर्यटन स्थलों से दूर रहें। प्रशासन का कहना है कि यह अस्थायी प्रतिबंध केवल लोगों की सुरक्षा और जनहानि रोकने के उद्देश्य से लगाया गया है। यदि सभी लोग सहयोग करेंगे तो मानसून के दौरान होने वाले हादसों से बचा जा सकेगा।